बिना नोटिस मकान गिराने का आरोप, प्रशासन ने नजूल जमीन पर अवैध कब्जा बताकर की थी कार्रवाई
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
पटियाली। अमीर खुसरो पुस्तकालय के पास चार सितंबर को तहसील प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर भाजपा मंडल अध्यक्ष विशाल कश्यप का मकान ध्वस्त किए जाने का मामला शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गया। विशाल कश्यप ने मत्स्य प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक एवं ब्रजक्षेत्र कार्य समिति के सदस्य सत्येंद्र कश्यप बॉबी और भाजपा प्रदेश मंत्री राकेश बिंद के साथ लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, शिकायत मिलने के बाद डीएम प्रणय सिंह ने मामले की जांच एडीएम दिग्विजय प्रताप सिंह को सौंप दी है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विशाल कश्यप ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बिना पूर्व नोटिस दिए उनके मकान को नजूल की जमीन पर अवैध कब्जा बताते हुए ध्वस्त कर दिया। उनका कहना है कि इससे उनका परिवार बेघर हो गया है। विशाल कश्यप के मुताबिक जमीन से संबंधित खतौनी, नगर पंचायत में जमा हाउस टैक्स की रसीदें समेत अन्य दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनकी पुश्तैनी जमीन को जबरन नजूल की जमीन घोषित कर दिया और कार्रवाई से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया।
एसडीएम आतीश कुमार के नेतृत्व में तहसील प्रशासन ने चार सितंबर को मकान को नजूल की जमीन पर अवैध कब्जा बताते हुए ध्वस्त किया था। प्रशासन के अनुसार पूरी जांच-पड़ताल के बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई और जमीन को कब्जामुक्त कराया गया। प्रशासन के मुताबिक कब्जामुक्त कराई गई जमीन की बाजार कीमत करीब दो करोड़ रुपये है।
कार्रवाई के बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया था। सबसे पहले समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष विक्रम यादव कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ आक्रोश जताया था। इसके बाद भाजपा नेता बॉबी कश्यप ने भी तहसील परिसर में प्रदर्शन कर कार्रवाई को गरीब विरोधी बताया था।
शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप भी कश्यप परिवार से मिलने पहुंचीं। उन्होंने परिवार का हाल जाना और मौके पर एसडीएम की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्य को उच्चाधिकारियों से फोन पर वार्ता कर तत्काल रुकवाया। रत्नेश कश्यप ने कहा कि उन्होंने एसडीएम से उन दस्तावेजों को दिखाने को कहा है, जिनके आधार पर जमीन को नजूल दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्पष्ट मंशा है कि किसी गरीब का घर न उजाड़ा जाए, लेकिन पटियाली तहसील प्रशासन की कार्रवाई सरकार की जनकल्याणकारी छवि के विपरीत है। उन्होंने परिवार को न्याय दिलाने के लिए शासन और उच्चाधिकारियों के संपर्क में रहने का आश्वासन दिया।
डीएम के आदेश पर एडीएम ने शुरू की जांच
शिकायत के बाद डीएम प्रणय सिंह ने मामले की जांच एडीएम दिग्विजय प्रताप सिंह को सौंप दी है। एडीएम शुक्रवार को मौके पर पहुंचे और जमीन तथा कार्रवाई से जुड़ी पूरी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पटियाली एसडीएम का चार्ज हटाया
इसी मामले के बीच डीएम प्रणय सिंह ने शुक्रवार को प्रशासनिक फेरबदल करते हुए आतीश कुमार से पटियाली एसडीएम और नगर पंचायत ईओ का चार्ज हटा दिया। उन्हें जिला मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। उनकी जगह सहावर एसडीएम सुशांत सांवरे को पटियाली का चार्ज सौंपा गया है। सहावर एसडीएम का दायित्व हर्षिता देवड़ा को दिया गया है, जबकि पटियाली नगर पंचायत ईओ का चार्ज एसडीएम सुनील कुमार संभालेंगे।