Tuesday, July 28, 2026

KASGANJ: 8.08 लाख की पाइपलाइन भुगतान जांच पर फिर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने जांच रिपोर्ट को बताया भ्रामक; फिर गरमाया मामला

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 26, 2026

KASGANJ: 8.08 लाख की पाइपलाइन भुगतान जांच पर फिर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने जांच रिपोर्ट को बताया भ्रामक; फिर गरमाया मामला

स्थलीय निरीक्षण न होने, संशोधित निविदा के अभिलेख गायब और जल कनेक्शन का रिकॉर्ड न देने का आरोप; स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच की दोबारा उठी मांग

जागरण टुडे, कासगंज

गंजडुंडवारा। नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा में पाइपलाइन बिछाने के नाम पर हुए ₹8.08 लाख के भुगतान का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर हुई विभागीय जांच पर शिकायतकर्ता ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए जांच रिपोर्ट को एकपक्षीय, अपूर्ण और भ्रामक बताया है। आरोप है कि जिस कार्य को लेकर शिकायत की गई थी, जांच उसी कार्य की न होकर दूसरे स्थान पर कर दी गई। वहीं जागरण टुडे की दोबारा पड़ताल में स्थानीय लोगों ने ऐसे तथ्य सामने रखे हैं, जिन्होंने पूरे मामले में सरकारी धन के उपयोग और योजना की उपयोगिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह मामला उस समय सुर्खियों में आया था जब जागरण टुडे ने वार्ड संख्या-25 में 110 एमएम पीवीसी पाइपलाइन बिछाने के नाम पर किए गए भुगतान की पड़ताल की थी। अभिलेखों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की धनराशि से अख्तर के घर से अंसार के घर तक, हासिम भाई के घर से फारूख के घर तक तथा पप्पू के घर से अतीक के घर तक पाइपलाइन बिछाने का कार्य स्वीकृत था। इसी कार्य के लिए 13 दिसंबर 2024 को एक कंस्ट्रक्शन फर्म के पक्ष में जीएसटी सहित ₹8,08,190 का भुगतान किया गया। हालांकि पड़ताल के दौरान स्थानीय लोगों ने संबंधित स्थानों पर अभिलेखों के अनुरूप पाइपलाइन बिछाए जाने से इनकार किया था, जिसके बाद पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई।

शिकायत का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष सचिव नवनीत सिंह चहल ने नगर विकास एवं नगरीय रोजगार एवं गरीबी उन्मूलन विभाग को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर पालिका परिषद की ओर से प्रस्तुत जांच आख्या पर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।


विभागीय जांच आख्या संशोधित निविदा के आधार पर में वार्ड संख्या-17 में जामा मस्जिद पुलिया से मोहनपुर रोड स्थित कोल्ड स्टोरेज तक 110 एमएम एचडीपीई पाइपलाइन विस्तार का उल्लेख कर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया।


जिस पर शिकायतकर्ता द्वारा शासन को भेजे अपने विस्तृत प्रत्युत्तर में जांच रिपोर्ट पर कई गंभीर आपत्तियां उठाई हैं। उनका कहना है कि किसी सक्षम अधिकारी द्वारा मौके पर जाकर स्थलीय निरीक्षण नहीं किया गया। कार्यस्थल परिवर्तन का दावा तो किया गया, लेकिन संशोधित निविदा किस प्रक्रिया के तहत जारी हुई, किस समाचार पत्र में प्रकाशित हुई और उसकी प्रमाणित प्रति क्या है, इसका कोई अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया गया। यदि कार्य वास्तव में किया गया था तो लाभार्थी उपभोक्ताओं की सूची, जल कनेक्शन आवेदन, स्वीकृति आदेश और जल कनेक्शन रजिस्टर भी जांच के साथ प्रस्तुत किए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके अलावा शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के दौरान न तो उनका पक्ष सुना गया और न ही उन्हें मौके पर बुलाया गया। केवल विभागीय स्पष्टीकरण के आधार पर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

इधर, जागरण टुडे ने मामले की दोबारा पड़ताल की तो जांच रिपोर्ट में जिस स्थान का उल्लेख किया गया, वहां भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। वार्ड संख्या-17 के निवासी गुफरान और मुन्ना ने बताया कि करीब डेढ़ वर्ष पहले पाइपलाइन तो डाली गई थी, लेकिन आज तक किसी भी घर को जल कनेक्शन नहीं दिया गया और न ही एक दिन पानी की आपूर्ति शुरू हुई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि पाइपलाइन डालने के बाद अभी कुछ समय पूर्व उसी मार्ग पर सीसी रोड का निर्माण भी करा दिया गया। अब यदि भविष्य में जल कनेक्शन देने होंगे तो नवनिर्मित सड़क को तोड़ना पड़ सकता है। उनका कहना है कि समय रहते कनेक्शन दे दिए जाते तो लोगों को योजना का लाभ मिल जाता, लेकिन अब पाइपलाइन जमीन के नीचे पड़ी हुई है और उसका कोई उपयोग नहीं हो रहा।

जागरण टुडे की पड़ताल में सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर सामने आया कि जब डेढ़ वर्ष बाद भी एक भी जल कनेक्शन नहीं दिया गया और पाइपलाइन से एक दिन भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई, तो आखिर इस पाइपलाइन को बिछाने की आवश्यकता क्या थी। यदि योजना का उद्देश्य लोगों तक पेयजल पहुंचाना था, तो बिना जलापूर्ति और बिना कनेक्शन के लाखों रुपये खर्च करने का औचित्य क्या है। इससे सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रथम दृष्टया यह मामला सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की ओर भी संकेत करता है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के बाद ही सामने आएगा।

अभिलेखों के अनुसार इस कार्य में ₹7,15,212 का बिल, ₹6,79,452 का शुद्ध भुगतान तथा जीएसटी सहित ₹8,08,190 का कुल भुगतान दर्ज है। शिकायत में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी, संबंधित अवर अभियंता, तत्कालीन पटल लिपिक, तत्कालीन चेयरमैन तथा कार्यदायी संस्था की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने शासन से मांग की है कि 20 जुलाई 2026 की विभागीय जांच रिपोर्ट को निरस्त कर पूरे प्रकरण की जांच किसी स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय अधिकारी अथवा अन्य जिले की जांच समिति से कराई जाए। साथ ही मापन पुस्तिका (एमबी), कार्यादेश, भुगतान अभिलेख, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, संशोधित निविदा, जल कनेक्शन संबंधी अभिलेख तथा स्थलीय निरीक्षण सहित अन्य तकनीकी दस्तावेजों की गहन जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि भुगतान वार्ड-25 में स्वीकृत पाइपलाइन को वार्ड-17 मे बिछाई भी गई तो डेढ़ वर्ष बाद तक न जल कनेक्शन दिए गए और न ही पानी की आपूर्ति शुरू हुई, फिर लाखों रुपये खर्च करने का उद्देश्य क्या था। इन सवालों का जवाब अब शासन स्तर पर होने वाली संभावित स्वतंत्र जांच से मिलने की उम्मीद है।

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