Tuesday, July 28, 2026

KASGANJ: रहस्यमयी दरारों में बिखरती जिंदगी, पाई-पाई जोड़कर बनाया था आशियाना...अब आंखों के सामने दरक रही जीवनभर की कमाई, प्रशासन से मदद की गुहार

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 24, 2026

KASGANJ: रहस्यमयी दरारों में बिखरती जिंदगी, पाई-पाई जोड़कर बनाया था आशियाना...अब आंखों के सामने दरक रही जीवनभर की कमाई, प्रशासन से मदद की गुहार

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

गंजडुंडवारा। एक इंसान पूरी जिंदगी इसलिए मेहनत करता है कि उसके परिवार के सिर पर अपनी छत हो। कोई मजदूरी कर एक-एक रुपया जोड़ता है, कोई अपनी जरूरतें छोड़कर ईंट और सीमेंट खरीदता है, तो कोई कर्ज लेकर अपने सपनों का घर बनाता है। उस घर की हर ईंट में उसकी मेहनत, त्याग और परिवार का भविष्य जुड़ा होता है। लेकिन जब वही घर अचानक बिना किसी चेतावनी के दरकने लगे, तो सिर्फ दीवारें नहीं टूटतीं इंसान का हौसला, उसका भरोसा और वर्षों की मेहनत भी बिखरने लगती है।


गंजडुंडवारा के मोहल्ला बरी थोक चौक में इन दिनों यही दर्द हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले करीब एक सप्ताह से कई मकानों में पड़ रही रहस्यमयी दरारों ने पूरे इलाके की खुशियां छीन ली हैं। जिन घरों को बनाने में लोगों ने अपनी पूरी उम्र की कमाई लगा दी, आज उन्हीं घरों को वे बेबस होकर टूटते देख रहे हैं।


जिस आंगन में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। जिन कमरों में परिवार ने वर्षों तक सुख-दुख बांटे, आज उन्हीं कमरों में जाने से लोग डर रहे हैं। रात होते ही किसी को नींद नहीं आती। हल्की-सी आवाज सुनकर लोग घबराकर बाहर निकल आते हैं। डर इस बात का है कि कहीं अगला पल उनके आशियाने का आखिरी पल न बन जाए।


वैसे नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा द्वारा प्रभावित भवन स्वामियों को मकान खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के बाद लोगों की चिंता और बढ़ गई है। कई परिवार अपने ही घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां या अन्य सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। वर्षों से संजोई गृहस्थी अब बोरियों, बक्सों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर इधर-उधर ले जाई जा रही है। महिलाओं की आंखों में दर्द हैं, बुजुर्ग दरकती दीवारों को देखकर खामोश हैं और बच्चे यह समझ नहीं पा रहे कि उनका अपना घर अचानक रहने लायक क्यों नहीं रहा।


स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके लिए यह सिर्फ मकान नहीं, बल्कि जीवनभर की कमाई है। किसी ने मजदूरी कर घर बनाया, किसी ने खेती बेचकर, तो किसी ने अपनी जमा-पूंजी और कर्ज के सहारे। अब डर इस बात का है कि यदि मकान गिर गए तो वे दोबारा घर बनाने की स्थिति में नहीं होंगे। कई परिवार आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि फिर से नया आशियाना खड़ा कर सकें।

प्रशासन से मदद की अपील

मुबीन, नबजुल, चांद मियां, सलीम, हाशिम और शरीफ सहित सभी प्रभावित परिवारों ने जिला प्रशासन से भावुक अपील करते हुए कहा है कि उन्हें इस संकट की घड़ी में अकेला न छोड़ा जाए। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा की दृष्टि से मकान खाली कराए जा रहे हैं तो प्रशासन उनके लिए जरूरी सुविधाओं की भी व्यवस्था करे। साथ ही यदि मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं तो प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उनकी वर्षों की मेहनत पूरी तरह बर्बाद न हो जाए।

लोगों का कहना है कि उनके सामने अब दोहरी मुसीबत है—एक ओर जान बचाने के लिए घर छोड़ना पड़ रहा है और दूसरी ओर सिर छिपाने के लिए कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। उनका दर्द है कि "घर छोड़ देना आसान है, लेकिन पूरी जिंदगी की कमाई को यूं बर्बाद होते देखना सबसे बड़ा दुख है।"

विशेषज्ञों की जांच की मांग

मोहल्लेवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि भू-वैज्ञानिकों, भवन संरचना विशेषज्ञों और लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं की संयुक्त टीम तत्काल भेजी जाए, ताकि पूरे क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वे कराया जा सके। लोगों का कहना है कि जब तक दरारों का वास्तविक कारण सामने नहीं आएगा, तब तक पूरे मोहल्ले के लोग भय के साये में जीते रहेंगे।

फिलहाल बरी थोक चौक में हर सुबह एक नई चिंता लेकर आती है। लोग सबसे पहले अपने घरों की दीवारों को देखते हैं कि कहीं रातभर में कोई नई दरार तो नहीं पड़ गई। हर बीतते दिन के साथ लोगों की उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं, लेकिन उन्हें अब भी भरोसा है कि जिला प्रशासन उनकी पीड़ा को समझेगा, राहत पहुंचाएगा और उनकी जीवनभर की कमाई को बचाने के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।

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