Tuesday, July 28, 2026

KASGANJ: लाखों खर्च... न चेतावनी, न उद्घोषणा! जनता को आपदा से पहले जगाने वाला पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम खुद सो गया....बना शोपीस

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 19, 2026

KASGANJ: लाखों खर्च... न चेतावनी, न उद्घोषणा! जनता को आपदा से पहले जगाने वाला पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम खुद सो गया....बना शोपीस

मुख्यमंत्री के निर्देश पर मई में लगा था,अलर्ट देने का दावा हवा मे; लोग बोले- 'नौ दिन चले अढ़ाई कोस'

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

गंजडुंडवारा। प्रदेश में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने और नागरिकों तक त्वरित सूचना पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नगर निकायों में पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम स्थापित किए गए। इसी क्रम में मई माह में नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा ने नगर के सात प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लाखों रुपये खर्च कर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगवाया। दावा था कि अब आंधी, बारिश, बिजली गिरने, आगजनी और अन्य आपात परिस्थितियों में चंद मिनटों में पूरे नगर को सतर्क किया जा सकेगा, लेकिन दो माह बाद यह व्यवस्था खुद ही खामोशी की चादर ओढ़े नजर आ रही है।

नगरवासियों के अनुसार सिस्टम लगने के समय परीक्षण के दौरान यह सिर्फ एक बार बजा, उसके बाद से चौराहों पर लगे लाउडस्पीकर मौन हैं। ऐसे में लोगों के बीच चर्चा है कि करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये की यह व्यवस्था कहीं "ढोल की पोल" बनकर तो नहीं रह गई।

नगर पालिका परिषद परिसर, बान मंडी तिराहा, राजाराम चौराहा, पटियाली तिराहा, हनुमानगढ़ी चौराहा सहित सात स्थानों पर लगाए गए पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से आंधी, तेज बारिश, बिजली गिरने की चेतावनी, आगजनी की सूचना, स्वास्थ्य एवं टीकाकरण कार्यक्रमों की जानकारी, स्वच्छता अभियान, यातायात डायवर्जन, कानून-व्यवस्था संबंधी संदेश तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाना था।

लेकिन वास्तविकता यह है कि मई के बाद नगर में तेज आंधी चली, बारिश हुई, बिजली आपूर्ति कई बार बाधित हुई और कई जनहित कार्यक्रम भी आयोजित हुए, लेकिन पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से कोई सार्वजनिक उद्घोषणा सुनाई नहीं दी। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस व्यवस्था को संकट की घड़ी का सबसे बड़ा सहारा बताया गया था, उसका उपयोग आखिर कब होगा।

कस्बावासी अमित कुमार कहना है कि यदि समय-समय पर सिस्टम का परीक्षण और संचालन ही नहीं किया जाएगा तो आपदा के समय इसके सफल होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। लोगों का मानना है कि शासन की मंशा सराहनीय है, लेकिन स्थानीय स्तर पर लापरवाही के कारण मामला "नौ दिन चले अढ़ाई कोस" जैसा दिखाई दे रहा है।

अब लोगों की नजर नगर पालिका परिषद पर है। सवाल यह है कि क्या लाखों रुपये से स्थापित यह पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम वास्तव में जनता की सुरक्षा और जनहित का प्रभावी माध्यम बनेगा, या फिर सरकारी योजनाओं की सूची में एक और ऐसा प्रोजेक्ट बनकर रह जाएगा, जिसकी मौजूदगी तो दिखेगी, लेकिन आवाज कभी सुनाई नहीं देगी।

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