Tuesday, July 28, 2026

KASGANJ: 4 लाख की पुलिया का फिर खुला 'घटिया निर्माण' का राज! 2024 में महीनेभर में उखड़ी, 2026 की मरम्मत भी नहीं टिक सकी

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 18, 2026

KASGANJ: 4 लाख की पुलिया का फिर खुला 'घटिया निर्माण' का राज! 2024 में महीनेभर में उखड़ी, 2026 की मरम्मत भी नहीं टिक सकी

मेंटिनेंस अवधि में पुराने ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं, दूसरे ठेकेदार से कराई मरम्मत भी हुई नाकाम; गुणवत्ता और जवाबदेही पर उठे गंभीर सवाल

जागरण टुडे, कासगंज

गंजडुंडवारा। नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा के वार्ड संख्या-17 स्थित शेरवानी स्कूल मार्ग पर वर्ष 2024 में करीब 4.25 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुलिया और एप्रोच सड़क एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। जिस निर्माण कार्य पर शुरुआत से ही गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे थे, वह निर्माण के महज एक माह के भीतर उखड़ने लगा था। जागरण टुडे की पड़ताल में सामने आया है कि करीब डेढ़ वर्ष बाद भी स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। जून 2026 में कराई गई मरम्मत भी कुछ ही दिनों में जवाब दे गई, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


जागरण टुडे की पड़ताल में सामने आया कि निर्माण के समय ही स्थानीय लोगों और सभासदों ने आरोप लगाया था कि पुलिया में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। लगभग 20 फीट चौड़ी पुलिया के नीचे से गुजरने वाले नाले की सफाई के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं छोड़ी गई। निर्माण के कुछ ही दिनों बाद सड़क की सतह से बजरी उखड़ने लगी, हल्की ठोकर लगते ही गिट्टी बाहर निकलने लगी और झाड़ू लगाने पर रेत उड़ने लगी थी। उस समय तत्कालीन अधिशासी अधिकारी सुनील कुमार ने निरीक्षण कर खामियों में सुधार का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।

निर्माण कार्य उस समय मेंटिनेंस अवधि में था, इसलिए नियमानुसार मरम्मत की जिम्मेदारी उसी ठेकेदार की थी जिसने निर्माण कराया था। जागरण टुडे की पड़ताल में यह भी सामने आया कि पुराने ठेकेदार को न तो कोई प्रभावी नोटिस दिया गया और न ही उसके विरुद्ध कोई कार्रवाई की गई।


इसके बाद जून 2026 में नगर पालिका ने उसी पुलिया और एप्रोच सड़क की मरम्मत दूसरे ठेकेदार से करा दी। मरम्मत के बाद उम्मीद थी कि समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन कुछ ही दिनों में सड़क फिर उखड़ने लगी और बजरी निकलने लगी। इससे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि मेंटिनेंस अवधि के दौरान पुराने ठेकेदार को जवाबदेह बनाकर उसी से गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराई जाती तो दोबारा मरम्मत कराने की नौबत नहीं आती। अब दूसरी बार कराई गई मरम्मत भी विफल होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

पूरे मामले ने नगर पालिका की तकनीकी निगरानी, गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब निर्माण शुरू से ही विवादों में था तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की, मेंटिनेंस अवधि में ठेकेदार को नोटिस क्यों नहीं दिया गया और दूसरे ठेकेदार से कराई गई मरम्मत भी आखिर कुछ ही दिनों में क्यों उखड़ गई।

इस संबंध में जेई (निर्माण) हेमंत कुमार का कहना है कि पुलिया की मरम्मत ठेकेदार से ही करा दी गई है और इस पर कोई सरकारी धन दोबारा खर्च नहीं किया गया।

वहीं उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष राम कुमार गुप्ता ने कहा कि निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की जा रही है। सड़कें और पुलिया कुछ ही समय में उखड़ रही हैं। यदि ऐसे मामलों में दोषियों की जवाबदेही तय नहीं हुई तो विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की बर्बादी का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

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