जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद के थाना सिकंदरपुर वैश्य क्षेत्र के गांव कादरगंज पुख्ता का चर्चित मीना देवी हत्याकांड अब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पहले महिला की गुमशुदगी, फिर हत्या का खुलासा, पांच घंटे तक हाईवे जाम, गंगा से शव बरामदगी और अब शव गांव पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगने से मामला लगातार नए मोड़ ले रहा है। बुधवार देर रात तक गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही और परिजनों ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। प्रशासन के कई घंटे के प्रयास, जनप्रतिनिधियों की समझाइश और निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बाद गुरुवार तड़के करीब 2 बजे भारी पुलिस सुरक्षा के बीच मीना देवी का अंतिम संस्कार कराया गया।
1.85 लाख रुपये के लेनदेन के बाद हुई वारदात
मृतका के पुत्र विक्रम सिंह के अनुसार उनकी मां मीना देवी ने गांव के ही सद्दाम पुत्र अजीम को करीब 1.85 लाख रुपये ब्याज पर दिए थे। आरोप है कि 6 जुलाई की शाम सद्दाम ने रुपये लौटाने के बहाने उन्हें बुलाया, जिसके बाद वह घर वापस नहीं लौटीं। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 8 जुलाई को गुमशुदगी दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने सद्दाम को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
परिजनों का दावा है कि 13 जुलाई की रात पूछताछ के दौरान सद्दाम ने हत्या की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस ने सद्दाम पुत्र अजीम, आफताब पुत्र जमील, सादाब पुत्र शब्बन और शोएब पुत्र सगीर के विरुद्ध अपहरण, हत्या समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
पांच घंटे तक हाईवे जाम, फिर गंगा से मिला शव
महिला का शव बरामद न होने से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार सुबह गंजडुंडवारा-बदायूं हाईवे पर करीब पांच घंटे तक जाम लगाया। शव बरामद करने और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बाद में पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर जाम खुलवाया। इसी दौरान गिरफ्तार आरोपी सद्दाम की निशानदेही पर पुलिस ने गंगा नदी से मीना देवी का शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
शव पहुंचते ही फिर भड़का आक्रोश
बुधवार शाम पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचा तो परिजनों और ग्रामीणों ने फरार आरोपियों आफताब, सादाब और शोएब की गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की मांग करते हुए अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया। गांव में देर रात तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार, एडीएम प्रदीप कुमार विमल, क्षेत्राधिकारी अमित कुमार, एसडीएम आतिश कुमार सिंह सहित कई थानों की पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव में डटे रहे। अधिकारियों ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और पूरे मामले में निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इसी दौरान भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष के.पी. सिंह सोलंकी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से वार्ता कर उन्हें समझाया-बुझाया और मामले में दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उनके हस्तक्षेप और प्रशासन के आश्वासन के बाद माहौल शांत हुआ।
पुलिसकर्मियों पर भी उठे सवाल
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मृतका के परिजनो ने अपर पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर थाना प्रभारी चंचल सिरोही, दरोगा रवेंद्र सिंह यादव और सिपाही वंशी चौधरी पर आरोपियों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। शिकायत के बाद पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई।
पुलिस के लिए चुनौती बना हत्याकांड
मीना देवी हत्याकांड अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर मुख्य आरोपी की निशानदेही पर शव बरामद होने के बावजूद तीन आरोपी अब भी फरार हैं, वहीं दूसरी ओर परिजनों द्वारा पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग ने पुलिस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ अधिकारी लगातार निगरानी बनाए हुए हैं और फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
काफी देर तक चली वार्ता, जनप्रतिनिधियों की समझाइश और प्रशासन के आश्वासन के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। इसके बाद गुरुवार तड़के करीब 2 बजे कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मीना देवी का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया।