प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन लोगों ने कभी योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया, उनके नाम पर सरकारी सब्सिडी निकाल ली गई। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में मृतकों को भी लाभार्थी दिखाकर अनुदान का भुगतान कर दिया गया। मामले में यूपीनेडा (UPNEDA) ने संबंधित वेंडर के खिलाफ कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।
यूपीनेडा के वरिष्ठ लिपिक रघुवर दयाल की ओर से दी गई तहरीर के अनुसार सचिव एवं मुख्य परियोजना अधिकारी के निर्देश पर सनराइज एंटरप्राइजेज की जांच कराई गई। जांच के दौरान फर्म के प्रोपराइटर आशु गुप्ता, निवासी सीबीगंज, की भूमिका संदिग्ध मिलने पर विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच में पता चला कि फर्म की ओर से तैयार किए गए 29 रूफटॉप सोलर आवेदनों में से नौ का मौके पर सत्यापन किया गया। इनमें आठ आवेदन पूरी तरह फर्जी पाए गए, जबकि केवल एक स्थान पर ही सोलर सिस्टम स्थापित मिला। इससे योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका और गहरा गई है।
मृतकों और अनजान लोगों को बनाया लाभार्थी
जांच के दौरान कुछ मामलों में मृत व्यक्तियों को योजना का लाभार्थी दिखाया गया। वहीं कई ऐसे लोगों के नाम पर भी सब्सिडी जारी कर दी गई, जिन्होंने कभी आवेदन नहीं किया और जिनके घरों पर सोलर पैनल भी नहीं लगाए गए। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के जरिए सरकारी धन का गबन किया गया।
यूपीनेडा के अनुसार आरोपी वेंडर ने फर्जी मोबाइल नंबर, कूटरचित आवेदन पत्र, दस्तावेजों में हेरफेर और चेक में बदलाव कर सरकारी सब्सिडी की राशि विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कराई। जांच में वित्तीय लेन-देन का तरीका भी संदिग्ध पाया गया है।
बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। विभाग का मानना है कि बैंक स्तर पर सहयोग के बिना इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। पुलिस अब बैंक खातों और ट्रांजैक्शन की भी जांच करेगी।
यूपीनेडा की तहरीर के आधार पर कैंट थाना पुलिस ने आशु गुप्ता के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति या बैंक कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।