राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार सुबह मथुरा महानगर का एकत्रीकरण कार्यक्रम बाबू शिवनाथ अग्रवाल महाविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में करीब एक हजार स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लेकर संगठन की एकजुटता और अनुशासन का परिचय दिया।
प्रातः छह बजे से स्वयंसेवकों का आगमन शुरू हो गया। निर्धारित समय पर परम पवित्र भगवा ध्वज के आरोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इसके बाद सूक्ष्म व्यायाम, प्राणायाम, गणगीत और विभिन्न संगठनात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम की भूमिका सह महानगर कार्यवाह श्रीओम ने रखी, जबकि गणगीत का प्रस्तुतीकरण भाग बौद्धिक प्रमुख बनवारी ने किया। एकल गीत की प्रस्तुति कीर्ति मोहन ने दी और मंचासीन पदाधिकारियों का परिचय महानगर कार्यवाह विजय बंटाजी ने कराया।
मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ब्रज प्रांत प्रचारक धर्मेंद्र कुमार ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। पिछले 100 वर्षों से संघ निरंतर हिंदू समाज के संगठन और राष्ट्र निर्माण के कार्य में जुटा हुआ है।
उन्होंने कहा कि संघ का मूल उद्देश्य समाज में चरित्रवान, अनुशासित और राष्ट्रहित के प्रति समर्पित नागरिक तैयार करना है। शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में सेवा, संस्कार और संगठन की भावना विकसित की जाती है। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने सौ वर्षों के सफर में अनेक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन अपने उद्देश्य से कभी विचलित नहीं हुआ।
धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रत्येक स्वयंसेवक का दायित्व है कि वह संघ के विचार और संगठनात्मक कार्य को समाज के प्रत्येक हिंदू तक पहुंचाने का प्रयास करे। समाज के सहयोग और सहभागिता से ही संगठन अपने लक्ष्यों को और प्रभावी ढंग से प्राप्त कर सकेगा।
कार्यक्रम के मुख्य शिक्षक महानगर शारीरिक प्रमुख दुर्गा प्रसाद रहे, जबकि संघ प्रार्थना महाराणा नगर कार्यवाह अनिल ने प्रस्तुत की। कार्यक्रम में विभाग संघचालक डॉ. वीरेंद्र, विभाग कार्यवाह छैलबिहारी, विभाग सह कार्यवाह डॉ. संजय, विभाग प्रचारक पारस पार्थ, महानगर संघचालक लक्ष्मीनारायण सहित विभाग, महानगर और नगर कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।