गंजडुंडवारा। नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मोहल्ला धनपाल स्थित गौरीशंकर मंदिर के सामने बनी सीसी सड़क पहले स्पीड ब्रेकर के निर्माण और फिर उसी के ऊपर सड़क बिछाकर ब्रेकर को लगभग समाप्त दफन कर देने के कारण चर्चा में आई थी। अब उसी सड़क की गुणवत्ता को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीसी सड़क निर्माण के बाद तकनीकी मानकों के अनुसार समय पर क्योरिंग (तराई) नहीं कराई गई। बताया जा रहा है कि सड़क बनने के एक सप्ताह से भी अधिक समय बाद तराई शुरू नही की गई, जबकि सीमेंट कंक्रीट सड़क में सामान्यतः 8 से 12 घंटे के भीतर क्योरिंग शुरू कर दी जानी चाहिए और कम से कम 14 दिनों तक नियमित रूप से जारी रहनी चाहिए। समय पर तराई न होने से कंक्रीट की मजबूती और सड़क की आयु प्रभावित होने की आशंका रहती है।
गौरतलब है कि इसी गली में करीब एक सप्ताह पहले नया स्पीड ब्रेकर बनाया गया था, लेकिन सड़क निर्माण शुरू होते ही वह ब्रेकर नई सड़क में दब गया। जिस स्पीड ब्रेकर का उद्देश्य वाहनों की गति नियंत्रित करना था, वह उपयोग में आने से पहले ही लगभग समाप्त हो गया। इस घटनाक्रम के बाद नगर पालिका की कार्ययोजना और निर्माण कार्यों के समन्वय पर गंभीर सवाल उठे थे।
अब सड़क निर्माण में कथित तकनीकी लापरवाही का मामला भी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ गया है। वार्डवासी संजीव उपाध्याय, राकेश गौतम और संजीव गुप्ता ने सड़क निर्माण की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित मानकों के विपरीत निर्माण कार्य हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय करते हुए संबंधितो एवं ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की है कि सड़क की गुणवत्ता की जांच किसी सक्षम तकनीकी संस्था या थर्ड पार्टी एजेंसी से कराई जाए। साथ ही निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, मोटाई, क्योरिंग की अवधि तथा कार्य की गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सड़क का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।
लोगों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण पहले से प्रस्तावित था तो स्पीड ब्रेकर बनाने की क्या आवश्यकता थी, और यदि सड़क बनने के बाद समय पर क्योरिंग भी नहीं कराई गई तो इससे सरकारी धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता दोनों पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
अब नगरवासियों की नजर नगर पालिका प्रशासन पर है कि वह इन आरोपों का क्या जवाब देता है और सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।