Tuesday, July 28, 2026

KASGANJ: कार्यकाल 3 साल पार...लेकिन गंजडुंडवारा पूछ रहा सवाल!आखिर विकास कहां है साहब

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: June 26, 2026

KASGANJ: कार्यकाल 3 साल पार...लेकिन गंजडुंडवारा पूछ रहा सवाल!आखिर विकास कहां है साहब

भ्रष्टाचार के आरोप, हंगामेदार बोर्ड बैठकें, एक दिन का अध्यक्ष, गौशाला विवाद, रैन बसेरे में बना भोज, अधूरे प्रोजेक्ट और गड्ढों पर स्पीड ब्रेकर; तीन साल का रहा बेहद चर्चित सफर

गंजडुंडवारा। 26 मई 2023 को नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा की नई सरकार ने बड़े वादों और उम्मीदों के साथ अपना कार्यकाल शुरू किया था। जनता को भरोसा था कि शहर की जर्जर सड़कें सुधरेंगी, जलभराव से राहत मिलेगी, सफाई व्यवस्था बेहतर होगी और नगर विकास की नई कहानी लिखेगा। लेकिन तीन साल बाद जब कार्यकाल का मूल्यांकन किया जाता है तो विकास कार्यों से अधिक विवाद, आरोप-प्रत्यारोप, धरने, आंदोलन और अधूरी योजनाएं चर्चा में दिखाई देती हैं।


इन तीन वर्षों में नगर पालिका कई बार सुर्खियों में रही, लेकिन अधिकांश अवसरों पर वजह विकास नहीं बल्कि विवाद रहे। सबसे गंभीर आरोप कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगे। खास बात यह रही कि आरोप विपक्ष की ओर से नहीं बल्कि स्वयं कई सभासदों ने लगाए। बोर्ड बैठकों में हंगामे हुए, सभासदों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, धरने दिए और यहां तक कि अनशन तक नौबत पहुंच गई।


शिकायतों के बाद कई निर्माण कार्यों की जांच के लिए टीम गठित की गई। एक बार जांच टीम के पहुंचने के दौरान शिकायत करने वाले सभासदों और विपक्षी पक्ष मे आमना-सामना भी हो गया। मामला थाने तक पहुंचा और तहरीरबाजी भी हुई।

 

शिकायतकर्ता गुट ने अभद्रता और विपक्षीयो ने पर विकास कार्यों में बाधा डालने के आरोप लगाए, इसको लेकर विपक्षी गुट तत्कालीन जिलाधिकारी से भी मिला। लेकिन इतने हाई बोल्टेज ड्रामे के बावजूद जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी। ऐसे में नालों, पुलियों और सड़कों की मौजूदा स्थिति को देखकर नगरवासी खुद सवाल खड़े करते नजर आते हैं।


एक दिन का अध्यक्ष बना चर्चा का विषय

नगर पालिका के तीन साल के कार्यकाल की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक वह रही जब विवादों के बीच एक बोर्ड बैठक निरस्त हो गई। इसके बाद सभासदों के एक गुट ने शासनादेश का हवाला देते हुए बैठक बुला ली। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में एक सभासद को "एक दिन का अध्यक्ष" बनाकर बैठक आयोजित कर ली गई।

बैठक में प्रस्ताव भी पारित हुए और प्रेस नोट भी जारी किया गया। इस घटनाक्रम ने नगर की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा बटोरी और यह मामला चाय की दुकानों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बना रहा।

सफाई कर्मचारियों ने दिखाई ताकत

तीन वर्षों के दौरान सफाई कर्मचारियों का आंदोलन भी पालिका प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना। मांगों को लेकर कर्मचारी हड़ताल पर चले गए, जिससे शहर में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई और कई स्थानों पर कूड़े के ढेर लग गए।

स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन को कर्मचारियों से वार्ता करनी पड़ी और अंततः उनकी कई मांगों पर सहमति बनानी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम ने कर्मचारियों की संगठनात्मक ताकत को भी सामने रखा।

अब्दुल हफीज गांधी बने रहे सिरदर्द

समाजसेवी अब्दुल हफीज गांधी पूरे कार्यकाल में पालिका प्रशासन के सबसे मुखर आलोचकों में शामिल रहे। उन्होंने सड़क, पुलिया, जलभराव और अन्य नागरिक समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई।


एक अवसर पर टूटी हुई पुलिया के निर्माण की मांग को लेकर उन्होंने उसी पुलिया पर बैठकर प्रदर्शन किया। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई और नगर में चर्चा का विषय बनी रही।

सांसद प्रतिनिधि की मौजूदगी पर उठे सवाल

नगर पालिका की बैठकों में एक और रोचक घटनाक्रम तब देखने को मिला जब सांसद प्रतिनिधि के रूप में अब्दुल हफीज गांधी की उपस्थिति को लेकर विवाद खड़ा हुआ। कई बार उनकी मौजूदगी के बीच बैठकों के निरस्त होने की घटनाएं भी चर्चा में रहीं।

गौशाला का वीडियो वायरल कांड

नगर पालिका के तीन साल के कार्यकाल के दौरान संचालित गौशाला भी विवादों में रही। गौशाला की बदहाल स्थिति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। वीडियो में गौवंश की देखभाल और अव्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठे, जिसके बाद अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।

मामला तूल पकड़ने पर आनन-फानन में व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया और हालात संभालने की कोशिश की गई। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए।

विडंबना यह भी रही कि लाखों रुपये की लागत से निर्मित नई गौशाला आज तक पूरी तरह संचालित नहीं हो सकी। जिस परियोजना को आवारा गोवंश की समस्या के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा था, वह वर्षों बाद भी अपेक्षित रूप से शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में नगरवासी सवाल उठाते हैं कि जब नई गौशाला तैयार है तो उसका लाभ गोवंश को आखिर कब मिलेगा।

रैन बसेरे में बना भोज, उठे सवाल

1 जनवरी 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक के दौरान एक और मामला चर्चा में आया। तस्वीरों के जरिए यह आरोप सामने आया कि गरीबों और जरूरतमंदों के लिए बनाए गए रैन बसेरे का उपयोग पार्टी के भोज तैयार करने के लिए किया गया।


मामला सार्वजनिक होने के बाद सवाल उठे, लेकिन किसी बड़ी कार्रवाई के अभाव में यह विवाद भी समय के साथ ठंडा पड़ गया।

रामलीला से पहले चमकी सड़कें, फिर लौटे गड्ढे

इस दौरान बड़े आयोजनों और रामलीला जैसे कार्यक्रमों से पहले मुख्य मार्गों पर पैचवर्क और मरम्मत का कार्य तेजी से कराया गया। लेकिन कुछ ही समय बाद सड़कें फिर उखड़ गईं और गड्ढे वापस दिखाई देने लगे। लोग तंज कसते हैं कि सड़कें भी शायद त्योहारों के साथ ही जागती हैं और फिर सो जाती हैं।


गड्ढे जस के तस, स्पीड ब्रेकर बेहिसाब

नगर की अधिकांश सड़कों पर गड्ढों की समस्या बनी रही। हालांकि इस दौरान जगह-जगह स्पीड ब्रेकर जरूर बनते दिखाई दिए। कई नागरिकों का कहना है कि सड़कों की मरम्मत की बजाय स्पीड ब्रेकरों की संख्या बढ़ती चली गई, जिससे राहगीरों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

तालाब किनारे 41 दुकानों का सपना अधूरा

तीन साल पूरे होने से ठीक पहले पालिका प्रशासन को एक बड़ा झटका तब लगा जब तालाब किनारे प्रस्तावित 41 दुकानों के निर्माण की योजना विवादों में घिर गई। योजना पर आपत्तियां दर्ज हुईं और विरोध बढ़ता गया। अंततः नगर पालिका को टेंडर निरस्त करना पड़ा।


सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि जिस तालाब का सौंदर्यीकरण वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका, उसके किनारे व्यावसायिक निर्माण की तैयारी क्यों की जा रही थी। विरोध के बाद न दुकानें बन सकीं और न ही अभी तक परियोजना आगे बढ़ पाई।


तीन साल बाद भी वही मूलभूत सवाल

कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने के बाद भी नगर के कई हिस्सों में जलभराव, टूटी सड़कें, बदहाल नालियां, और पेयजल जैसी मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। जिन उम्मीदों के साथ जनता ने 2023 में नया नेतृत्व चुना था, उनमें से कई अभी भी अधूरी दिखाई देती हैं।

नगर के बाजारों और गलियों में आज भी एक सवाल अक्सर सुनाई देता है,"तीन साल तो गुजर गए, लेकिन विकास आखिर पहुंचा कहां?"

किसी को भ्रष्टाचार के आरोप याद हैं, किसी को एक दिन का चेयरमैन, किसी को गौशाला का वायरल वीडियो, किसी को रैन बसेरे का विवाद, किसी को टूटी पुलिया पर हुआ प्रदर्शन और किसी को 41 दुकानों का अधूरा सपना।

हालांकि तीसरे वर्ष के अंत में अधिशासी अधिकारी के तबादले के बाद पालिका का प्रभार एसडीएम न्यायिक पटियाली ए के सिंह को सौंपा गया है। ऐसे में नगरवासियों को उम्मीद है कि शेष कार्यकाल में विकास कार्यों को नई गति मिल सकती है।

अब निगाहें आने वाले समय पर हैं—क्या बचे हुए कार्यकाल में विकास की तस्वीर बदलेगी या फिर विवाद और सवाल ही नगर पालिका की पहचान बने रहेंगे।

No ads available.

Get In Touch

BDA COLONY HARUNAGLA, BISALPUR ROAD BAREILLY

+91 7017029201

sanjaysrivastav1972@gmail.com

Follow Us

© 2026 Jagran Today. All Rights Reserved.