भ्रष्टाचार के आरोप, हंगामेदार बोर्ड बैठकें, एक दिन का अध्यक्ष, गौशाला विवाद, रैन बसेरे में बना भोज, अधूरे प्रोजेक्ट और गड्ढों पर स्पीड ब्रेकर; तीन साल का रहा बेहद चर्चित सफर
गंजडुंडवारा। 26 मई 2023 को नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा की नई सरकार ने बड़े वादों और उम्मीदों के साथ अपना कार्यकाल शुरू किया था। जनता को भरोसा था कि शहर की जर्जर सड़कें सुधरेंगी, जलभराव से राहत मिलेगी, सफाई व्यवस्था बेहतर होगी और नगर विकास की नई कहानी लिखेगा। लेकिन तीन साल बाद जब कार्यकाल का मूल्यांकन किया जाता है तो विकास कार्यों से अधिक विवाद, आरोप-प्रत्यारोप, धरने, आंदोलन और अधूरी योजनाएं चर्चा में दिखाई देती हैं।
इन तीन वर्षों में नगर पालिका कई बार सुर्खियों में रही, लेकिन अधिकांश अवसरों पर वजह विकास नहीं बल्कि विवाद रहे। सबसे गंभीर आरोप कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगे। खास बात यह रही कि आरोप विपक्ष की ओर से नहीं बल्कि स्वयं कई सभासदों ने लगाए। बोर्ड बैठकों में हंगामे हुए, सभासदों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया, धरने दिए और यहां तक कि अनशन तक नौबत पहुंच गई।
शिकायतों के बाद कई निर्माण कार्यों की जांच के लिए टीम गठित की गई। एक बार जांच टीम के पहुंचने के दौरान शिकायत करने वाले सभासदों और विपक्षी पक्ष मे आमना-सामना भी हो गया। मामला थाने तक पहुंचा और तहरीरबाजी भी हुई।
शिकायतकर्ता गुट ने अभद्रता और विपक्षीयो ने पर विकास कार्यों में बाधा डालने के आरोप लगाए, इसको लेकर विपक्षी गुट तत्कालीन जिलाधिकारी से भी मिला। लेकिन इतने हाई बोल्टेज ड्रामे के बावजूद जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं हो सकी। ऐसे में नालों, पुलियों और सड़कों की मौजूदा स्थिति को देखकर नगरवासी खुद सवाल खड़े करते नजर आते हैं।