जागरण टुडे, बरेली
पूर्व प्रधानमंत्री एवं सामाजिक न्याय के पुरोधा राजा विश्वनाथ प्रताप सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हुए सविता महासभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. मिथलेश सिंह सविता ने कहा कि वीपी सिंह का संपूर्ण जीवन गरीबों, किसानों, मजदूरों, शोषितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष में समर्पित रहा।
उन्होंने कहा कि 25 जून 1931 को प्रयागराज में जन्मे विश्वनाथ प्रताप सिंह ने छात्र जीवन से ही सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। आचार्य विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी हजारों बीघा भूमि दान कर सामाजिक सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया।
प्रो. सविता ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में वीपी सिंह ने दस्यु उन्मूलन अभियान चलाकर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री रहते हुए कर चोरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया। रक्षा मंत्री के रूप में बोफोर्स मामले को उजागर कर उन्होंने राजनीतिक ईमानदारी और नैतिकता की मिसाल पेश की।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में प्रधानमंत्री बनने के बाद वीपी सिंह ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस फैसले ने देश में सामाजिक न्याय की नई दिशा तय की और पिछड़े वर्गों के राजनीतिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त किया।
वीपी सिंह ने किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी संघर्ष किया। दादरी-गाजियाबाद क्षेत्र में किसानों की अधिग्रहित भूमि वापस दिलाने के लिए उन्होंने कानूनी लड़ाई लड़ी। किसानों, मजदूरों और वंचितों के हितों के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से रोहिणी आयोग की सिफारिशें तथा उत्तर प्रदेश सरकार से सामाजिक न्याय समिति की संस्तुतियां लागू करने की मांग करते हुए कहा कि यही वीपी सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और सामाजिक न्याय के उनके अधूरे सपने को पूरा किया जा सकेगा।- प्रो मिथलेश सिंह सविता, प्रदेश अध्यक्ष सविता महा सभा