डीएम के आदेश पर बनी थी चार सदस्यीय जांच टीम, मौके पर पहुंचे अफसर; आज धराशायी नाला पूछ रहा सवाल- आखिर किसे बचाने के लिए दबाई गई रिपोर्ट
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा में विकास कार्यों के नाम पर कागजो मे हुए लाखों रुपये के खर्च और उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। वैसे दो वर्ष पहले जिस मामले ने नगर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी, आज उसी मामले का एक निर्माण कार्य जांच की पूरी कहानी बयां करता नजर आ रहा है।
क्यों कि वर्ष 2024 में भी कई सभासदों ने हल्ला काटा पीला ईंट क्षेत्र, अमीर खुसरो स्कूल के पास नाला निर्माण, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम से शिकायत की थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच के आदेश दिए।
पत्रांक-1198/एलबीसी/2024 के तहत 13 जून 2024 को गठित जांच टीम में तत्कालीन एसडीएम प्रदीप विमल, अधिशासी अभियंता विद्युत अजय सविता, अधिशासी अभियंता जल निगम सैयद तारिक तथा अधिशासी अभियंता निर्माण नंद किशोर को शामिल किया गया। टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया, अभिलेख खंगाले और शिकायतों की बिंदुवार जांच की। लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह खुद जांच के घेरे में है।
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान ऐसे कई तथ्य और साक्ष्य सामने आए थे, जिन्होंने संबंधित कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। नगरवासियों को उम्मीद थी कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी और जनता के धन का हिसाब लिया जाएगा। मगर हुआ इसका ठीक उल्टा। जांच रिपोर्ट कभी सार्वजनिक नहीं हुई, किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई नहीं हुई और पूरा मामला फाइलों में कैद होकर रह गया।
इधर, जागरण टुडे की टीम ने जब शिकायत के प्रमुख बिंदुओं में शामिल अमीर खुसरो स्कूल के पास बने नाले का स्थलीय निरीक्षण किया तो वहां की तस्वीरों ने कई सवाल खड़े कर दिए। लाखों रुपये की लागत से निर्मित बताया गया नाला कई स्थानों पर धराशायी मिला। जगह-जगह टूटी दीवारें, उखड़ा निर्माण और जर्जर संरचना यह बताने के लिए काफी थी कि शिकायतें आखिर क्यों हुई थीं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप हुआ था तो कुछ ही समय में नाले की ऐसी हालत कैसे हो गई? और यदि शिकायतें निराधार थीं तो फिर धरातल पर दिखाई दे रही यह बदहाली किसकी गवाही दे रही है?
नगर में अब चर्चा है कि आखिर पत्रांक-1198/एलबीसी/2024 की जांच रिपोर्ट में ऐसा क्या था जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया। लोग पूछ रहे हैं कि क्या जांच केवल औपचारिकता थी या फिर जांच में सामने आए तथ्यों पर जानबूझकर पर्दा डाल दिया गया?
फिलहाल अमीर खुसरो स्कूल के पास धराशायी पड़ा नाला सिर्फ एक टूटा हुआ निर्माण नहीं, बल्कि उस जांच का जीवंत दस्तावेज बन चुका है जिसकी फाइलें भले ही दफ्तरों में दबा दी गई हों, लेकिन जिसके सवाल आज भी जनता के बीच गूंज रहे हैं।