जागरण टुडे,(राहुल गुप्ता/ उदित विजय)
कासगंज। आमतौर पर घर-परिवार और चौका-चूल्हे की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने वाली गांव की महिलाएं रविवार को अचानक आंदोलनकारी बन गईं। पटियाली क्षेत्र के ग्राम लधोली में शराब के ठेके के खिलाफ महिलाओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि घूंघट की ओट में रहने वाली महिलाएं सीधे ठेके पर पहुंच गईं और शराबबंदी के नारे लगाते हुए ठेके पर धावा बोल दिया। देखते ही देखते महिलाओं ने दुकान में रखी शराब और बीयर की पेटियां बाहर सड़क पर फेंकना शुरू कर दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
रविवार सुबह करीब 10:30 बजे जैसे ही गांव स्थित देशी और अंग्रेजी कम्पोजिट शराब दुकान का शटर उठा, पहले से रणनीति बनाकर पहुंची महिलाओं की टोली ठेके में घुस गई। महिलाओं का गुस्सा देखकर सेल्समैन भी घबरा गया। कुछ ही देर में सड़क पर शराब और बीयर की पेटियां बिखरी दिखाई देने लगीं और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना था कि शराब गांव के लिए अभिशाप बन चुकी है। उनका आरोप था कि नशे की लत ने कई परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। शराब पीकर घर लौटने वाले लोग पत्नी और बच्चों के साथ मारपीट करते हैं, जिससे परिवारों का माहौल बिगड़ रहा है। महिलाओं ने कहा कि गांव के युवाओं का भविष्य भी नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है।
महिलाओं के आक्रोश की एक बड़ी वजह हाल ही में गांव में हुई वह दर्दनाक घटना भी रही, जिसमें एक महिला ने कथित रूप से पारिवारिक कलह और पति की शराबखोरी से परेशान होकर अपने मासूम बेटे को जहर देने के बाद स्वयं भी जान दे दी थी। इस घटना ने गांव की महिलाओं को झकझोर दिया और उन्होंने शराब के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने का फैसला कर लिया।
हंगामे की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी चंचल सिरोही, पटियाली कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अजयवीर सिंह, आबकारी निरीक्षक हेमंत कुमार शर्मा, महिला पुलिस बल तथा अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया, लेकिन महिलाएं अपनी मांग पर अड़ी रहीं।
मौके पर पहुंचकर तहसीलदार रामनयन सिंह और नायब तहसीलदार मुकेश कुमार ने महिलाओं से वार्ता की। महिलाओं ने दो टूक कहा कि गांव में शराब का ठेका किसी भी कीमत पर नहीं चलने दिया जाएगा। काफी देर तक चली बातचीत के बाद अधिकारियों ने मामले पर विचार करने और उच्चाधिकारियों तक मांग पहुंचाने का आश्वासन दिया।
आबकारी विभाग ने महिलाओं से 15 दिन का समय मांगा, जिसके बाद दोपहर करीब दो बजे प्रदर्शन समाप्त हुआ। हालांकि जाते-जाते महिलाओं ने चेतावनी भी दे दी कि यदि तय समय सीमा के भीतर ठेके को हटाने या अन्य समाधान की दिशा में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और बड़ा रूप लेगा।
गांव में दिनभर इस घटना की चर्चा रही। लोगों का कहना था कि पहली बार लधोली में महिलाओं ने इतने संगठित और आक्रामक अंदाज में किसी मुद्दे को लेकर आवाज बुलंद की है। अब सबकी निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।