Saturday, June 13, 2026

अभिषेक बने नवाबगंज के प्रभारी तहसीलदार, भू-घोटाले की जांच तेज

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: May 11, 2026

अभिषेक बने नवाबगंज के प्रभारी तहसीलदार, भू-घोटाले की जांच तेज

नवाबगंज के भू-घोटाले की जांच के लिए डीएम ने गठित की तीन सदस्यीय कमेटी

जागरण टुडे, बरेली

जनपद बरेली की तहसील नवाबगंज के गांव ज्योरा मकरंदपुर के चर्चित सरकारी जमीन प्रकरण में डीएम ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। वहीं, तहसीलदार नवाबगंज दुष्यन्त प्रताप सिंह को कलेक्ट्रेट से संबंद्ध कर उनकी जगह नायब तहसीदार सदर अभिषेक तिवारी को प्रभारी तहसीलदार नवाबगंज कि जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं, इस मामले में राजस्व विभाग के तत्कालीन तहसीलदार से लेकर कई और कर्मचारियों की भूमिका जांच के घेरे में आ गई है।

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने एडीएम ई पूर्णिमा सिंह, एडीएम सिटी सौरभ दुबे और एसडीएम नवाबगंज को जांच सौंपी है। टीम ने जांच में पुराने राजस्व अभिलेख, नामांतरण फाइलें और धारा-38 की कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज खंगाना शुरू कर दिए है। सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि वर्ष 2013 के निरस्त पट्टों को आधार बनाकर सरकारी भूमि को निजी पक्ष के कब्जे में बनाए रखने की कोशिश की गई। सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि कई महत्वपूर्ण फाइलों में मूल दस्तावेजों के बजाय फोटोकॉपी लगाकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

इस मामले में कानूनगो श्याम सुंदर गुप्ता की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि उन्होंने लेखपाल की अनिवार्य आख्या के बिना ही फाइल को आगे बढ़ा दिया। वहीं, तत्कालीन तहसीलदार स्तर से भी मूल अभिलेखों का सत्यापन किए बिना प्रकरण को न्यायालय भेजे जाने की बात सामने आ रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप था कि जब शिकायत के बाद प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, तब भी कब्जा हटाने की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी बीच कब्जेदारों को अदालत से स्टे लेने का मौका मिल गया। यदि समय रहते कार्रवाई होती तो सरकारी जमीन को बचाया जा सकता था। अब पूरे मामले में तहसील प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिलाधिकारी ने तहसीलदार नवाबगंज दुष्यन्त प्रताप सिंह को हटाकर उनकी जगह नायब तहसीदार सदर अभिषेक तिवारी को प्रभारी तहसीलदार नवाबगंज कि जिम्मेदारी दी है।

23 महीने तक लड़ते रहे ग्रामीण

गांव के सूरजपाल और लालाराम ने करीब 23 महीने पहले इस मामले की शिकायत तहसील दिवस में की थी। आरोप है कि शुरुआत में उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन लगातार प्रयासों और दस्तावेजी साक्ष्यों के बाद मामला जिलाधिकारी तक पहुंचा। अब प्रशासन इस पूरे प्रकरण को राजस्व विभाग में हुए बड़े फर्जीवाड़े के रूप में देख रहा है। जांच टीम यह भी खंगाल रही है कि क्या इसी तरह अन्य सरकारी जमीनों में भी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर कब्जे कराए गए हैं।

मामले की गंभीरता से लेते हुए जांच की जा रही है। तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। कई और नाम भी सामने आ सकते हैं। - अविनाश सिंह, जिलाधिकारी बरेली

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