जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद कासगंज की गंजडुंडवारा नगर पालिका परिषद में इन दिनों एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—आखिर ‘परदे के पीछे’ कौन नगर की सरकार चला रहा है? नगर में लगातार यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पालिका परिषद के संचालन और फैसलों में किसी बाहरी व्यक्ति का दखल है, जिसका असर विकास कार्यों और प्रशासनिक निर्णयों पर साफ दिखाई दे रहा है।
नगर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि पालिका परिषद में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि मौजूद होने के बावजूद कई महत्वपूर्ण फैसले कथित तौर पर “परदे के पीछे” से लिए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इसी हस्तक्षेप के चलते कई बार पालिका के भीतर रार और तकरार की स्थिति बनी। अंदरूनी मामलों में बढ़ते दखल को लेकर असंतोष की आवाजें भी उठती रही हैं।
इस चर्चा ने इसलिए भी जोर पकड़ा है क्योंकि नगर पालिका परिषद के मौजूदा कार्यकाल को तीन साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन विकास के नाम पर हालात अब भी संतोषजनक नहीं हैं। चुनाव के समय नगरवासियों ने जिस बदलाव की उम्मीद की थी, वह धरातल पर नजर नहीं आ रहा।
तीन साल बीतने के बाद भी नगर की सड़कें बदहाल हैं। कई जगह सड़कें टूटकर गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। नालियों की सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, जबकि कुछ कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब जनता सवाल कर रही है कि आखिर विकास की रफ्तार इतनी धीमी क्यों रही? क्या योजनाएं कागजों तक सीमित रह गईं, या फिर जिम्मेदारों की प्राथमिकताओं में विकास पीछे छूट गया? और क्या “परदे के पीछे” से हो रहे कथित हस्तक्षेप ने विकास कार्यों की दिशा और गति दोनों को प्रभावित किया?
नगरवासियों का कहना है कि जब जनता ने अपने प्रतिनिधि चुनकर पालिका में भेजे हैं, तो फिर बार-बार किसी बाहरी दखल की चर्चाएं क्यों सामने आ रही हैं? क्या निर्णय लेने की असली शक्ति किसी और के हाथों में है, या फिर यह सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हैं?
हालांकि इस पूरे मामले पर न तो कोई जिम्मेदार अधिकारी खुलकर बोल रहा है और न ही जनप्रतिनिधि। लेकिन नगर में उठ रही चर्चाएं इस ओर जरूर इशारा कर रही हैं कि पालिका के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।
अब जबकि कार्यकाल के तीन साल पूरे होने को हैं, जनता विकास कार्यों का हिसाब मांग रही है। आने वाले समय में यह मुद्दा और गर्मा सकता है कि आखिर गंजडुंडवारा नगर पालिका परिषद में विकास क्यों नहीं दिखा और ‘परदे के पीछे’ कौन नगर की सरकार चला रहा है?