बरेली शरीफ स्थित दरगाह आले रसूल स्थित खानकाह वामिकिया निशातिया में पीर-ए-तरीकत सय्यद मोहम्मद मियां वामिकी अशरफी के निधन के बाद गुरुवार को सोयम की फातेहख्वानी के दौरान नए सज्जादानशीन की ताजपोशी की गई। बड़ी संख्या में मौजूद अकीदतमंदों के बीच हज़रत मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी को खानकाह की गद्दीनशीनी की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बताया गया कि सय्यद मोहम्मद मियां वामिकी अशरफी का बुधवार को इंतकाल हो गया था। उन्हें शाहदाना रोड स्थित दरगाह वामिकिया परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके सोयम के मौके पर दोपहर में फातेहख्वानी का आयोजन किया गया, जिसमें शहर और बाहर से आए अकीदतमंदों ने शिरकत की।
इसी दौरान कछौछा शरीफ के सज्जादानशीन हज़रत ताजुलौलिया अल्लामा सैयद जलालुद्दीन अशरफ जीलानी उर्फ कादरी मियां ने मौलाना सय्यद असलम मियां वामिकी की दस्तारबंदी कर उन्हें सज्जादानशीन घोषित किया। इस मौके पर गाजीपुर स्थित धावा शरीफ के सज्जादानशीन सय्यद जफर हुसैन ने दुआ कर नई जिम्मेदारी के लिए कामयाबी की कामना की।
नए सज्जादानशीन असलम मियां वामिकी को यह जिम्मेदारी मिलने पर शहर के उलेमा और समाजसेवियों ने मुबारकबाद दी। बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी खां वारसी, शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम, अहमद उल्लाह वारसी, प्रो. मौलाना महमूद हुसैन और डॉ. कासिमुद्दीन समेत कई लोगों ने दुआओं से नवाजा।
इसके बाद दरगाह पर गुलपोशी और चादरपोशी की रस्म अदा की गई। दरगाह नासिर मियां रहमतुल्लाह अलेह से लाई गई साबरी चादर भी मजार शरीफ पर पेश की गई। इस दौरान सूफी वसीम मियां, शाने अली कमाल मियां साबरी, रिजवान साबरी, नन्ना मियां और सलीम साबरी समेत कई अकीदतमंद मौजूद रहे।
सोयम की फातेहख्वानी के दौरान मरहूम की मगफिरत और दरजात बुलंदी के लिए खास दुआ की गई। साथ ही देश में अमन-ओ-चैन और भाईचारे की दुआ भी की गई।
उल्लेखनीय है कि खानकाह वामिकिया निशातिया सूफी परंपरा और इंसानी खिदमत के लिए जानी जाती है। यहां से हमेशा आपसी भाईचारे और शांति का संदेश दिया जाता रहा है।