सारस्वत समारोह में साहित्यकारों का सम्मान, कवि सम्मेलन में बही भावनाओं की सरिता
बरेली शहर की प्रतिष्ठित एवं प्राचीन साहित्यिक संस्था कवि गोष्ठी आयोजन समिति के तत्वावधान में स्टेडियम रोड स्थित लोक खुशहाली सभागार में मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य एवं यादगार आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार गणेश ‘पथिक’ ने किया।
इस अवसर पर गणेश ‘पथिक’ द्वारा संपादित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका ‘ठहाका सत्य पथिक’ के प्रवेशांक (होली-नवरात्रि विशेषांक) का लोकार्पण अतिथियों के कर-कमलों से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रणधीर प्रसाद गौड़ ‘धीर’ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में समाजसेवी अनिल कुमार सक्सेना एडवोकेट उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में नवगीतकार रमेश गौतम, डॉ. महेश ‘मधुकर’, शायर विनय सागर जायसवाल, डॉ. शिवशंकर यजुर्वेदी, कैलाश चंद्र मिश्र ‘रसिक’, डॉ. (श्रीमती) मिथिलेश राकेश ‘मिथिला’ सहित अनेक साहित्यकार मंचासीन रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। वरिष्ठ कवि इंद्रदेव त्रिवेदी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
सम्मान समारोह
इस अवसर पर समाजसेवी अनिल कुमार सक्सेना एडवोकेट एवं साहित्यकार बृजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’ को उनके साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए शॉल, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
काव्य गोष्ठी की झलक
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
- विनय सागर जायसवाल ने अपनी प्रभावशाली ग़ज़ल से सामाजिक यथार्थ को स्वर दिया।
- गणेश ‘पथिक’ ने संघर्ष और सकारात्मक बदलाव पर आधारित अपनी ग़ज़ल से खूब तालियां बटोरीं।
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बृजेंद्र तिवारी ‘अकिंचन’ का गीत—
“आँख से आँसू को मोड़ा जा रहा है, दर्द को ऐसे निचोड़ा जा रहा है…”
ने श्रोताओं के मन को गहराई से छू लिया। - डॉ. मिथिला राकेश की ग़ज़ल और उनका दोहा संग्रह “घायल हैं सम्बन्ध” भी सराहा गया।
- अभिषेक अग्निहोत्री, अमित मनोज, डॉ. मुकेश मीत, मिलन कुमार ‘मिलन’ सहित अन्य कवियों ने भी अपने सशक्त काव्य पाठ से माहौल को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन आशु कवि राज शुक्ल ‘ग़ज़लराज’ ने प्रभावशाली शैली में किया।
अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।