उत्तर, दक्षिण और पश्चिम में आंदोलन को मिला ठोस विस्तार : महेंद्र प्रताप
श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति की मांग को लेकर संचालित राष्ट्रव्यापी अभियान अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास और संयुक्त भारतीय धर्म संसद के संयुक्त तत्वावधान में आचार्य राजेश्वर जी महाराज के नेतृत्व में निकाली जा रही यात्रा अपने तीसरे चरण में लगभग 2000 किलोमीटर की दूरी तय कर 11 अप्रैल को मथुरा पहुंचेगी। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि एक संगठित जनजागरण अभियान के रूप में उभरती दिख रही है।
यात्रा के दौरान देशभर में 125 स्थानों पर सभाओं का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी दर्ज की गई। इन सभाओं में श्री कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक, धार्मिक और न्यायिक पहलुओं को प्रमुखता से उठाया गया। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को इस मुद्दे पर एक मंच पर लाना भी रहा है।
विशेष बात यह है कि यह आंदोलन अब तक देश की तीन प्रमुख दिशाओं—उत्तर, दक्षिण और पश्चिम—में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। पहले चरण में द्वारिका, दूसरे चरण में बद्रीनाथ और तीसरे चरण में दक्षिण भारत से निकली यात्रा ने अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर पहुंचाया है। इसके परिणामस्वरूप इन क्षेत्रों में विषय को लेकर जनचेतना और संवाद में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।
श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण के हिन्दू पक्षकार एवं न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट का कहना है कि यह अभियान अब एक संगठित राष्ट्रीय विमर्श का रूप ले रहा है। उनका दावा है कि यात्रा के माध्यम से प्राप्त जनसमर्थन ने आंदोलन को नई दिशा और गति प्रदान की है, जिससे भविष्य में इसके और व्यापक होने की संभावना है।
यात्रा के मथुरा आगमन पर सलेमपुर रोड स्थित केडीएस इंटरनेशनल स्कूल में एक बड़ी सभा प्रस्तावित है। आयोजकों के अनुसार, यह सभा अब तक के अभियान के निष्कर्षों और आगामी रणनीति को निर्धारित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।