मूसाझाग क्षेत्र के नगर पंचायत गुलडिया देहात अंतर्गत ग्राम पंचायत बसैया खेड़ा लाल भुजिया में आयोजित प्रसिद्ध पच भैया महाराज का ऐतिहासिक मेला चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मेले में पहुंचे और मंदिर में दर्शन-पूजन कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। मेले में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
यह मेला लगभग ढाई सौ वर्ष पुराना बताया जाता है और इसका इतिहास एक अत्यंत मार्मिक घटना से जुड़ा हुआ है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, करीब 250 साल पहले दातागंज के पांच व्यापारी अपनी छठी बहन के साथ दिल्ली से व्यापार कर वापस लौट रहे थे। उनके साथ एक हाथी और एक पालतू कुत्ता भी था। जब वे जंगल क्षेत्र में पहुंचे, तभी घात लगाए बैठे बदमाशों ने उन पर हमला कर लूटपाट शुरू कर दी। विरोध करने पर बदमाशों ने पहले बहन की हत्या कर दी, जिसके बाद पांचों भाइयों ने बहादुरी से मुकाबला किया, लेकिन संख्या अधिक होने के कारण सभी की हत्या कर दी गई। इस दर्दनाक घटना के बाद बदमाशों ने हाथी और कुत्ते को भी मार डाला।
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इस घटना से व्यथित स्थानीय लोगों ने उन सभी की स्मृति में यहां मेला लगाना शुरू किया, जो आज भी परंपरा के रूप में जारी है। मेले के स्थल पर बने मंदिर में पांचों भाई-बहन के साथ हाथी और कुत्ते की मूर्तियां स्थापित हैं। क्षेत्रीय लोगों के बीच इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है।
मेले के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में प्रसाद चढ़ाते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। यहां मुंडन संस्कार जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराए जाते हैं। मेले में ग्रामीण संस्कृति की झलक भी देखने को मिली, जहां विभिन्न दुकानों, झूलों और खान-पान की व्यवस्थाओं ने लोगों का आकर्षण बढ़ाया।
इस बार मेले की व्यवस्था मेला समिति द्वारा काफी सुव्यवस्थित और आकर्षक रखी गई थी। साफ-सफाई, पेयजल और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन की ओर से भी पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, जिससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
मेले के सफल आयोजन में मेला समिति और स्थानीय प्रशासन का विशेष योगदान रहा, जिसके चलते यह ऐतिहासिक आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य रूप से संपन्न हुआ।