जागरण टुडे, राहुल गुप्ता कासगंज।
जनपद के पटियाली थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। रेलवे रोड निवासी ध्रुव कुमार ने आरोप लगाया है कि 22 मार्च को सहजन नगला निवासी अंशुमान उर्फ धर्मेंद्र, प्रवेंद्र, प्रदीप और रमनपाल समेत अन्य लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की।
पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने शोर मचाया तो उनका साला नितिन उर्फ राजा, जो कि कन्नौज का निवासी है, मौके पर पहुंचा। आरोप है कि हमलावरों ने उस पर भी लाठी-डंडों और सरिया से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि नितिन उर्फ राजा की नाक की हड्डी टूट गई और उसे काफी रक्तस्राव हुआ।
घटना के बाद पुलिस ने घायलों का चिकित्सीय परीक्षण कराया, लेकिन इस कार्रवाई को लेकर पीड़ित पक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब मारपीट में दोनों पक्षों के लोग घायल हुए थे, तो पुलिस ने केवल एक पक्ष का ही मेडिकल परीक्षण क्यों कराया। इससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे बड़ा विवाद मजरूमी चिट्ठी को लेकर सामने आया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि 22 मार्च को हुई घटना के बावजूद पुलिस ने मजरूमी चिट्ठी 25 मार्च को जारी की, जो कि तीन दिन की देरी है। उनका कहना है कि यह देरी संदेह पैदा करती है और इसमें सांठगांठ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले में जब थाना प्रभारी अजयवीर सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि एक पक्ष उसी दिन साधन के माध्यम से थाने पहुंच गया था, जबकि दूसरा पक्ष 25 मार्च को पहुंचा। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की चिकित्सीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।