Tuesday, March 31, 2026

KASGANJ:“प्रशासन के दावे हवा में,गैस माफिया जमीन पर हावी”,कागजों में डिलीवरी,बाजार में कालाबाजारी- सांठगांठ के उठे सवाल

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: March 23, 2026

KASGANJ:“प्रशासन के दावे हवा में,गैस माफिया जमीन पर हावी”,कागजों में डिलीवरी,बाजार में कालाबाजारी- सांठगांठ के उठे सवाल

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

जिले में रसोई गैस की कालाबाजारी प्रशासन के “जीरो टॉलरेंस” के दावों को खुली चुनौती देती नजर आ रही है। एक ओर जिला प्रशासन के निर्देशन में पूर्ति विभाग सख्ती का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कस्बों और मोहल्लों में घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर खुलेआम मनमानी कीमतों पर बेचे जा रहे हैं।

स्थिति यह है कि जहां आम उपभोक्ता दावो के विपरित गैस सिलैंडर के लिए जूझ रहा है, वहीं छोटी-बड़ी दुकानों पर सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हैं। इन दुकानो पर घरेलू सिलेंडर 1500 से 1800 रुपये तक और व्यावसायिक सिलेंडर भी निर्धारित दरों से अधिक कीमत पर बेचे जा रहे है।

लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल सप्लाई चेन में गड़बड़ी और संबंधित गैस एजेंसियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। घरेलू सिलेंडरों को अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग में खपाकर कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही है।

बुकिंग में खेल, कागजों में ज्यादा डिलीवरी

मामले का एक चौंकाने वाला पहलू यह भी सामने आया है कि गैस एजेंसी स्तर पर बुकिंग डेटा में हेरफेर किया जा रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्होंने जहां अब तक 5 सिलेंडर मंगाए हैं, वहीं रिकॉर्ड में 10 सिलेंडर की डिलीवरी दिखा दी गई है।

यह गड़बड़ी न केवल उपभोक्ताओं के हक पर डाका है, बल्कि कालाबाजारी को बढ़ावा देने का एक संगठित तरीका भी हो सकती है।

कृत्रिम किल्लत से बढ़ रहीं कीमतें

जानकारों के अनुसार गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के चलते इस तरह की अनियमितताएं बढ़ रही हैं। एक तरफ उपभोक्ता को समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी तरफ खुले बाजार में इसकी उपलब्धता पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है।

ऑडिट और जांच की उठी मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गैस एजेंसियों के स्टॉक, बुकिंग और वितरण प्रणाली का गहन ऑडिट कराया जाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि दैनिक आपूर्ति और डिलीवरी रिकॉर्ड की पारदर्शी जांच ही इस खेल का पर्दाफाश कर सकती है।

कागज नहीं, जमीनी कार्रवाई जरूरी

लोगों का मानना है कि पूर्ति विभाग को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर छापेमारी और सख्त निगरानी करनी होगी। दोषियों पर कठोर कार्रवाई ही इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगा सकती है।

वही लोगों का यह भी कहना है यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह कालाबाजारी और भी बड़े स्तर पर फैल सकती है, जिससे आम जनता की परेशानी और बढ़ना तय है।

No ads available.

Get In Touch

BDA COLONY HARUNAGLA, BISALPUR ROAD BAREILLY

+91 7017029201

sanjaysrivastav1972@gmail.com

Follow Us

© 2026 Jagran Today. All Rights Reserved.