Tuesday, March 31, 2026

बैंक यूनियनों का ऐलान, पांच दिवसीय बैंकिंग नहीं हुई तो बेमियादी हड़ताल

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: January 27, 2026

बैंक यूनियनों का ऐलान, पांच दिवसीय बैंकिंग नहीं हुई तो बेमियादी हड़ताल

स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर किया प्रदर्शन, यूएफबीयू के आह्वान पर ठप रहे बैंकिंग कार्य

जागरण टुडे, बरेली

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियन (यूएफबीयू) के देशव्यापी आह्वान पर मंगलवार को कचहरी रोड स्थित स्टेट बैंक की मुख्य शाखा पर विशाल और जोरदार प्रदर्शन हुआ। इस प्रदर्शन में बरेली जनपद के समस्त सरकारी बैंकों के अधिकारी और कर्मचारियों ने भारी संख्या में सहभागिता की। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था को लागू कराने की वर्षों पुरानी और न्यायसंगत मांग को मजबूती से उठाना था। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी के माध्यम से सरकार और वित्त मंत्रालय का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित किया। बैंक कर्मचारियों की एकजुटता और अनुशासन ने प्रदर्शन को पूरी तरह सफल और प्रभावशाली बना दिया।


प्रदर्शन का संचालन यूएफबीयू के जिला संयोजक कॉमरेड नवींद्र कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि बैंक प्रबंधन, अधिकारी एवं कर्मचारी संगठनों की सहमति से 18 माह पूर्व पांच दिवसीय बैंकिंग का ड्राफ्ट सरकार को सौंपा जा चुका है, इसके बावजूद सरकार की ओर से उस पर निर्णय न लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने वित्त मंत्रालय से सवाल किया कि आखिर किन कारणों से सरकार बैंक कर्मियों की जायज मांगों को लगातार टाल रही है। यूएफबीयू के उपाध्यक्ष कॉमरेड संतोष तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए विवश होंगे। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन एवं बीटीयूएफ की महिला पदाधिकारी कॉमरेड गीता शान्त ने सरकार की श्रम विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि नए लेबर कानून कर्मचारियों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

केनरा बैंक अधिकारी संघ की कॉमरेड रश्मि शर्मा ने स्पष्ट कहा कि जब तक पांच दिवसीय बैंकिंग लागू नहीं होती, यह आंदोलन निरंतर चलता रहेगा। यूएफबीयू के अध्यक्ष कॉमरेड पीके माहेश्वरी ने सरकार के अड़ियल रवैये की निंदा करते हुए कहा कि हमारी यूनियन पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ संघर्ष कर रही है। इस बार भी अपनी मांगें संघर्ष के बल पर हासिल की जाएंगी। प्रदर्शन में स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक, यूपी ग्रामीण बैंक, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक सहित विभिन्न बैंकों और संगठनों से बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में सरकार से बैंक कर्मियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की और आंदोलन को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।

प्रदर्शन में ये रहे शामिल 

स्टेट बैंक से भूपेंद्र कुमार, मनोज कुमार, पूजा कौशल, विकास कुमार, राजेंद्र शर्मा, बीटीयूफ व बरेली कॉलेज कर्मचारी संगठन से जितेंद्र मिश्रा, हरिशंकर, इंडियन बैंक से आशीष शुक्ला, बैंक ऑफ बड़ौदा से मुनीश बाबू, अमित कुमार, अशद अली, सोनम शर्मा, गेंदन लाल, सेंट्रल बैंक अधिकारी संघ से बीडी सिंह, पंजाब नेशनल बैंक से अरविंद आनंद, हेतराम, आईबॉक से सुमित भटनागर, विशाल अवस्थी, अधिकारी संघ से संजीव अग्रवाल, वाईएन मिश्रा, डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक से सोहन कुमार गुप्ता, यूनियन बैंक से शैलेन्द्र कश्यप, केनरा बैंक से राहुल गौर, यूपी ग्रामीण बैंक से सूरज तिवारी और स्टेट बैंक पेंशन संगठन से कॉमरेड एमसी खर्कवाल, अवधेश अग्रवाल सहित अनेक साथियों ने सहभागिता कर प्रदर्शन को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।

निजी बैंक हड़ताल से बाहर, समर्थन जताया

बैंकों की मंगलवार की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में निजी बैंक औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने इस आंदोलन को नैतिक समर्थन दिया। निजी बैंकों के कर्मचारियों ने मांगों को जायज बताते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ एकजुटता व्यक्त की।

हड़ताल से 450 करोड़ की बैंकिंग प्रभावित

बैंक यूनियन की ओर से मंगलवार को हुई देशव्यापी बैंक हड़ताल का असर जिले की बैंकिंग व्यवस्था पर व्यापक रूप से पड़ा। जिले में एक दिन की हड़ताल से करीब 400 से 450 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ। हड़ताल से ग्राहकों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी भारी असर पड़ा।

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