वृंदावन शोध संस्थान में हिंदी पखवाड़ा के अंर्तगत आचार्य विद्यानिवास मिश्र के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर हिंदी और आचार्य विद्यानिवास मिश्र विषयक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दौरान मुख्य वक्ता प्रो. उदय प्रकाश पांडे वाराणसी ने कहा कि जो भाषा पराधीनता के समय स्वतंत्र थी, वही स्वाधीनता के बाद पराधीन हो गई है। आचार्य विद्यानिवास को इस बात का दुःख था कि हिंदी भाषा अपनी जनपदीय बोलियों ब्रज, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली एवं बघेली आदि से दूर हो गई है। इसकी बोलियों को सशक्त बनाकर ही हिंदी को समर्थ बनाया जा सकता है। कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. नटवर नागर ने कहा कि हिंदी अध्यापन के अंतर्गत हिंदी की बोलियों को भी पढ़ाया जाना आवश्यक है।
गोपाल शरण शर्मा ने कहा कि आचार्य विद्यानिवास जब केएमआई संस्थान आगरा के निदेशक पद पर कार्यरत थे, तब वे कई बार वृंदावन आए। उन्होंने गीत-गोविंद की सरल टीका माधव रंग रंगी राधा लिखी। संस्थान के निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी ने कहा कि हिंदी साहित्य के क्षेत्र में आचार्यश्री प्रमुख स्तंभ थे। उनके साहित्यिक योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया था। इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण, मूर्ति देवी पुरस्कार जैसे सम्मानों से अलंकृत किया गया था।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ ठा. बांकेबिहारी के चित्रपट पर अतिथियों द्वारा माल्यार्पण से हुआ। मंगलाचरण में सोनाली वर्मा ने भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समन्वय व संचालन डॉ. करुणेश उपाध्याय एवं धन्यवाद ज्ञापन ब्रज संस्कृति संग्रहालय क्यूरेटर ममता कुमारी ने किया। संरक्षण कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं को अतिथियों ने प्रमाण पत्र वितरित किए। श्रीरामकृष्ण विवेकानंद जूनियर हाईस्कूल के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
इस दौरान डॉ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी, नैंसी रावत, रोहित, तनु, साक्षी वर्मा, रजनी, कविता, पूजा कुमारी, अनुशा, सीमा शर्मा, हर्षिता, एकता शर्मा, गुंजन शर्मा, भारती, पूजारानी सारस्वत, अदिति सारस्वत, योगेश शर्मा, रूपेश कुमार, रेनू, सिद्धार्थ, विद्या पांडेय, प्रगति शर्मा, रेखारानी, दीक्षा, योगिता, करवेंद्र सिंह, उमाशंकर पुरोहित, कृष्णकुमार मिश्रा, शिवम शुक्ला, अशोक दीक्षित, देवोपमदास, रनवीर आदि उपस्थित रहे।