नदी-नाले उफान पर, पुल टूटे, घर-दुकानें बहीं, हजारों लोग फंसे
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी और आसपास के इलाकों में बादल फटने और अतिवृष्टि से भीषण तबाही मची है। अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग लापता हैं। सैलाब के साथ आया मलबा घरों, होटलों, रिसॉर्ट, मंदिरों और सड़कों में घुस गया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने अब तक एक हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
इन इलाकों में हुई सबसे ज्यादा तबाही
देहरादून के सदर, विकासनगर, सहस्त्रधारा, कार्लीगाड़, मंझारा, मालदेवता, मसूरी के झड़ीपानी, प्रेमनगर, गुच्चूपानी और ठाकुरपुर क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सहस्त्रधारा के पास कई मकानों और रिसॉर्ट में मलबा घुसने से आधा दर्जन लोग लापता हो गए। झड़ीपानी में मकान ढहने से दो लोगों की मौत हुई, जबकि राजपुर रोड के पास पिता-पुत्री समेत तीन की मौत हो गई। विकासनगर में टोंस नदी के तेज बहाव में खनन कार्य कर रहे 14 मजदूर ट्रैक्टर समेत बह गए। इनमें से 8 के शव बरामद कर लिए गए, जबकि 4 लोग अभी भी लापता हैं। मृतकों में ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और संभल जिले के रहने वाले थे।
टपकेश्वर मंदिर तक पहुंचा बाढ़ का पानी
देहरादून की तमसा नदी में बाढ़ का पानी प्रसिद्ध टपकेश्वर मंदिर तक पहुंच गया। शिवलिंग और विशाल हनुमान प्रतिमा भी पानी में डूब गई। पुजारी ने बताया कि पिछले 25-30 वर्षों में ऐसा दृश्य पहली बार देखने को मिला है। पिथौरागढ़ में भूस्खलन से एक महिला की मौत हो गई जबकि नैनीताल के कालाढूंगी में गरुड़ी नाले में वाहन बह गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की जान गई।
संकट की घड़ी में सरकार पीड़ितों के साथ: मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रभावित इलाकों का दौरा किया और राहत-बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि "आपदा की इस घड़ी में सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।" प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी सीएम धामी से बात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।