उत्तर प्रदेश के जनपद शाहजहांपुर में पराली और गन्ने की पत्ती जलाने वाले किसानों पर इस बार प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करेगा। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फसल अवशेष जलाने पर नियमानुसार 30 हजार रुपये तक जुर्माना वसूला जाएगा और विधिक कार्रवाई भी की जाएगी। ऐसे किसानों का गन्ने का सट्टा निरस्त करने के साथ ही सरकारी खरीद में धान बेचने, खाद-बीज प्राप्त करने और कृषि विभाग की अन्य योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में पराली प्रबंधन को लेकर जनपद स्तरीय समिति की बैठक हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी उत्कर्ष द्विवेदी, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अरविंद कुमार, उप कृषि निदेशक पीके मिश्रा समेत कृषि, राजस्व, विकास, पशुपालन, परिवहन, शिक्षा, पंचायत राज और सहकारिता विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
पिछले साल सेटेलाइट से मिली थीं 139 घटनाएं
बैठक में बताया गया कि पिछले वर्ष जनपद में सेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की 139 घटनाएं चिन्हित की गई थीं। इन मामलों में संबंधित किसानों से जुर्माना वसूलने के साथ गन्ने का सट्टा निरस्त करने और लेवी पर धान खरीद से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की गई थी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस वर्ष भी पराली जलाने के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान, सचिव, लेखपाल और अन्य क्षेत्रीय कर्मचारियों की मौजूदगी में रात्रि चौपाल आयोजित कर किसानों को पराली न जलाने के लिए जागरूक करने के निर्देश दिए।
बिना एसएमएस यंत्र के धान काटने वाली कंबाइन होगी सीज
जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए फसल कटाई के दौरान भी निगरानी बढ़ाई जाए। बिना एसएमएस (स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम) यंत्र के धान की कटाई करने वाली कंबाइन को सीज किया जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित के खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रशासन ने किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की है। अधिकारियों के अनुसार पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, जिसका प्रतिकूल असर जनस्वास्थ्य पर पड़ता है। इसके अलावा खेत की मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है।
कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी
कृषि विभाग की ओर से पराली प्रबंधन के लिए किसानों को कृषि यंत्र उपलब्ध कराने पर ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। जिलाधिकारी ने किसानों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने को कहा।
उन्होंने खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों द्वारा एकत्र की गई पराली को उठवाकर गौशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा किसान पशुपालन विभाग की ‘पराली दो, खाद लो’ योजना का भी लाभ उठा सकते हैं। इसके तहत किसान नजदीकी गौशाला में पराली देकर उसके बदले खाद प्राप्त कर सकते हैं।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पराली जलाने वाले किसानों को मिलने वाले सरकारी लाभों को नियमानुसार रोकने की कार्रवाई भी की जाए। उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन में किसानों का सहयोग जनहित और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है।