अमृत योजना 2.0 के तहत तीन साल से अधूरा पड़ा तालाब, चारों ओर सुरक्षा घेराबंदी नहीं, बरसात में बढ़ा बड़ा खतरा
गंजडुंडवारा। शहर के विकास और जल संरक्षण के उद्देश्य से अमृत योजना 2.0 के तहत कादरगंज रोड स्थित प्राचीन तालाब (गाटा संख्या-345) की 0.131 हेक्टेयर भूमि पर एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सौंदर्यीकरण एवं विकास कार्य कराया जा रहा है। लेकिन जागरण टुडे की पड़ताल में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिस निर्माण कार्य को एक वर्ष में पूरा होना था, वह करीब तीन वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि बरसात के मौसम में गहराई तक खोदे गए तालाब की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।
जागरण टुडे की टीम ने मौके पर पहुंचकर देखा कि निर्माणाधीन तालाब की केवल मुख्य सड़क की ओर बैरिकेडिंग की गई है, जबकि अन्य तीन दिशाओं से पूरा परिसर खुला पड़ा है। इन हिस्सों से कोई भी बच्चा, राहगीर या मवेशी आसानी से निर्माणाधीन तालाब तक पहुंच सकता है। तालाब के चारों ओर घनी आबादी है, कई मकान बने हुए हैं और दिनभर लोगों का आना-जाना लगा रहता है। बरसात में पानी भरने के बाद तालाब की वास्तविक गहराई दिखाई नहीं देगी, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करोड़ों रुपये की परियोजना पर कार्य कराया जा रहा है तो सुरक्षा मानकों का पालन आखिर क्यों नहीं किया गया। देश और प्रदेश में खुले गड्ढों, निर्माणाधीन तालाबों और बिना सुरक्षा घेराबंदी वाले स्थलों पर हुए हादसों में कई मासूमों और राहगीरों की जान जा चुकी है। हर दुर्घटना के बाद संबंधित विभाग सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे करता है, लेकिन कादरगंज रोड स्थित यह निर्माण स्थल उन दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
इस संबंध में जब जागरण टुडे ने कार्यदायी विभाग के अवर अभियंता हेमंत कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि तालाब निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि एक वर्ष थी, लेकिन भूमि विवाद के कारण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी। हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि यदि सुरक्षा इंतजामों के अभाव में कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, तो इस प्रश्न पर उन्होंने न तो नगर पालिका और न ही कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी स्वीकार की।
इसके बाद नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी के सीयूजी नंबर पर संपर्क किया गया। कॉल लेखाकार श्रीकांत शर्मा ने रिसीव की और कहा कि इस विषय में जानकारी संबंधित जेई ही दे सकते हैं। यानी जनता की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर भी नगर पालिका की ओर से कोई स्पष्ट और आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया।
निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों के अनुसार पूरे परिसर की मजबूत बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था तथा आम लोगों की आवाजाही रोकने के पर्याप्त इंतजाम किए जाने चाहिए। लेकिन मौके पर केवल मुख्य सड़क की ओर बैरिकेडिंग दिखाई दी, जबकि अन्य कई स्थान पूरी तरह खुले मिले। वहीं रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी बोर्ड भी नजर नहीं आए। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या करोड़ों रुपये की इस परियोजना में जनसुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कल कोई बच्चा, राहगीर, बुजुर्ग या मवेशी इस निर्माणाधीन तालाब में गिरकर हादसे का शिकार हो जाता है, तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या जिम्मेदार विभाग तब भी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ लेंगे, या फिर किसी बड़े हादसे से पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी?
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी प्रणय सिंह से मांग की है कि निर्माणाधीन तालाब के चारों ओर तत्काल मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाए, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं, रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएं, ताकि किसी भी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।