Thursday, July 30, 2026

KASGANJ: चंद दूरी पर थी पुरानी पाइपलाइन, फिर लाखों रुपये खर्च कर नई लाइन क्यों डाली, सरकारी धन के दुरुपयोग के उठे सवाल

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 27, 2026

KASGANJ: चंद दूरी पर थी पुरानी पाइपलाइन, फिर लाखों रुपये खर्च कर नई लाइन क्यों डाली, सरकारी धन के दुरुपयोग के उठे सवाल

जागरण टुडे की पड़ताल में स्थानीय लोगों का दावा- पुरानी लाइन से ही दिए जा सकते थे कनेक्शन, डेढ़ साल बाद भी नई पाइपलाइन से नहीं पहुंचा एक बूंद पानी

जागरण टुडे, कासगंज

नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा में पाइपलाइन विस्तार कार्य पर हुए ₹8.08 लाख के भुगतान का मामला अब नए सवालों के घेरे में आ गया है। जागरण टुडे की पड़ताल में सामने आया है कि जिस स्थान पर नई पाइपलाइन बिछाई गई, वहां से चंद दूरी पर पहले से ही समानांतर पुरानी पाइपलाइन मौजूद थी। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि उद्देश्य केवल पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना था, तो पुरानी लाइन से ही जल कनेक्शन दिए जा सकते थे। इसके बावजूद लाखों रुपये खर्च कर नई पाइपलाइन डाल दी गई, लेकिन करीब डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो एक भी घर को जल कनेक्शन मिला और न ही पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति शुरू हो सकी।

जागरण टुडे की दोबारा पड़ताल के दौरान वार्ड संख्या-17 के निवासी गुफरान और मुन्ना ने बताया कि पाइपलाइन करीब डेढ़ वर्ष पहले डाली गई थी, लेकिन आज तक उसका कोई लाभ लोगों को नहीं मिला। उनका कहना है कि सड़क के दूसरी ओर पहले से पुरानी पाइपलाइन मौजूद थी, जिससे आसानी से कनेक्शन दिए जा सकते थे। यदि नई पाइपलाइन डाली भी गई थी तो उसे तत्काल चालू कर लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इतना ही नहीं, अब उसी मार्ग पर सीसी सड़क का निर्माण भी करा दिया गया है। ऐसे में यदि भविष्य में जल कनेक्शन दिए जाते हैं तो नई सड़क को तोड़ना पड़ सकता है।

यह मामला पहले से ही मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुका है। मूल शिकायत वार्ड संख्या-25 में 15वें वित्त आयोग की धनराशि से स्वीकृत 110 एमएम पीवीसी पाइपलाइन कार्य तथा उस पर हुए ₹8,08,190 के भुगतान को लेकर की गई थी। अभिलेखों के अनुसार अख्तर के घर से अंसार के घर तक, हासिम भाई के घर से फारूख के घर तक तथा पप्पू के घर से अतीक के घर तक पाइपलाइन बिछाने का कार्य स्वीकृत था। शिकायत के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने नगर विकास विभाग को निष्पक्ष जांच के निर्देश भी दिए थे।

हालांकि जांच आख्या में निविदा संशोधन का हवाला देते हुए वार्ड संख्या-17 में जामा मस्जिद पुलिया से मोहनपुर रोड स्थित कोल्ड स्टोरेज तक 110 एमएम एचडीपीई पाइपलाइन विस्तार का उल्लेख कर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया। लेकिन जांच रिपोर्ट में सामने आए इन तथ्यों ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

जागरण टुडे की पड़ताल में सबसे बड़ा प्रश्न यही उभरकर सामने आया कि जब पास में पहले से पुरानी पाइपलाइन मौजूद थी, तब नई पाइपलाइन डालने की आवश्यकता क्या थी? और यदि लाखों रुपये खर्च कर नई लाइन बिछाई गई तो डेढ़ वर्ष बाद भी एक भी जल कनेक्शन क्यों नहीं दिया गया?

यदि पुरानी पाइपलाइन से ही लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता था और नई पाइपलाइन आज तक उपयोग में नहीं लाई गई, तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग की आशंका भी पैदा करता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष सक्षम प्राधिकारी द्वारा कराई जाने वाली निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

अब पूरे मामले पर लोगों की निगाहें दोबारा होने वाली जांच पर टिकी हैं। सभी यह जानना चाहते हैं कि लाखों रुपये की इस पाइपलाइन परियोजना की वास्तविक आवश्यकता क्या थी, या फिर यह कदम किसी प्रशासनिक अथवा निविदा संबंधी प्रक्रिया के बचाव में उठाया गया। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो यह मामला सार्वजनिक धन के उपयोग और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

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