-पास्को एक्ट की विशेष अदालत का फैसला, अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके
जागरण टूडे, कासगंज।
विशेष न्यायाधीश (पास्को एक्ट) धनंजय मिश्रा की अदालत ने नाबालिग से गैंगरेप और छेड़छाड़ के मामले में मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने पक्ष एवं विपक्ष की दलीलें सुनने के बाद साक्ष्यों के अभाव में तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
मामला सिढ़पुरा थाना क्षेत्र के गांव नगला खैमी का है। अभियोजन के अनुसार, एक नाबालिग पीड़िता ने 21 मई 2022 को गांव के एक किशोर तथा रविकांत और योगेंद्र पुत्र सुरेंद्र सिंह के विरुद्ध छेड़छाड़ और सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने एक जुलाई 2022 को आरोप पत्र विशेष न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (पास्को एक्ट) की अदालत में चल रही थी।
मंगलवार को अदालत में अंतिम सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने के लिए पर्याप्त एवं ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
इसी आधार पर विशेष न्यायाधीश धनंजय मिश्रा ने तीनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता केशव मिश्रा ने बताया कि न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में तीनों आरोपियों को बरी किया है। उन्होंने कहा कि अदालत का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुरूप दिया गया है।
इस फैसले के साथ करीब चार वर्ष से न्यायालय में विचाराधीन यह मामला समाप्त हो गया।