Thursday, July 30, 2026

KASGANJ: लाखों की इमारत, फिर भी अधूरी पढ़ाई....12वीं की मान्यता का इंतजार कब होगा खत्म!अब नए प्रभारी ईओ से जगी उम्मीद

लेखक: udit kumar | Category: उत्तर प्रदेश | Published: July 11, 2026

KASGANJ: लाखों की इमारत, फिर भी अधूरी पढ़ाई....12वीं की मान्यता का इंतजार कब होगा खत्म!अब नए प्रभारी ईओ से जगी उम्मीद

एक साल पहले महिला आयोग सदस्य ने शासन स्तर पर पहल की थी, फिर भी इंटरमीडिएट की मान्यता अब तक अधर में

जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)

कस्बा गंजडुंडवारा के सुदामापुरी रोड स्थित नगर पालिका कन्या पाठशाला की बनी नई इमारत धीरे-धीरे अपने उद्देश्य की पूर्ति का इंतजार करते-करते अब जर्जर होने लगी है। लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया भवन छात्राओं की चहल-पहल का केंद्र बनने के बजाय वर्षों से इंटरमीडिएट (12वीं) की मान्यता का इंतजार कर रहा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा क्षेत्र की बेटियों को उठाना पड़ रहा है, जिन्हें हाईस्कूल के बाद पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे विद्यालयों का सहारा लेना पड़ता है। कई छात्राओं की शिक्षा आर्थिक और सामाजिक कारणों से बीच में ही छूट जाती है।


वैसे करीब एक वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ ने विद्यालय का निरीक्षण कर यहां की समस्या को गंभीरता से सुना था। उस समय उन्होंने बालिका शिक्षा के हित में इस विषय को शासन स्तर पर उठाकर आवश्यक प्रयास करने की बात कही थी। उनके स्तर से पहल भी हुई, लेकिन अब तक विद्यालय को इंटरमीडिएट की मान्यता नहीं मिल सकी।


हालांकि अब इस लंबे इंतजार के बीच एक नई उम्मीद दिखाई देने लगी है। नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा के नवागत प्रभारी अधिशासी अधिकारी/ एसडीएम सुशांत सांवरे ने शुक्रवार को विद्यालय का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया है। उन्होंने विद्यालय को 12वीं तक की मान्यता दिलाने के प्रयासों में तेजी लाने का भरोसा दिया है। उनके निरीक्षण और सकारात्मक पहल से क्षेत्र के अभिभावकों व नागरिकों में एक बार फिर उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित यह मांग अब पूरी हो सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मांग वर्षों पुरानी है और कई बार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के समक्ष उठाई जा चुकी है। यदि समय रहते मान्यता मिल जाती तो कस्बे और आसपास के क्षेत्र की सैकड़ों बेटियों को अपने ही नगर में इंटरमीडिएट तक शिक्षा का अवसर मिल जाता।

वहीं, लाखों रुपये की लागत से बनी नई इमारत भी पर्याप्त उपयोग और नियमित रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है। जिस भवन में शिक्षा का माहौल होना चाहिए था, वहां अब उपेक्षा के निशान दिखाई देने लगे हैं। स्थानीय नागरिक राम कुमार गुप्ता का कहना है कि यदि जल्द मान्यता मिल जाती है तो एक ओर सरकारी संसाधनों का सार्थक उपयोग होगा, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र की बेटियों को उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

अब लोगों की निगाहें प्रशासन और शिक्षा विभाग के निर्णय पर टिकी हैं। क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि नवागत प्रभारी अधिशासी अधिकारी एसडीएम सुशांत सांवरे की पहल को जिला प्रशासन का सकारात्मक सहयोग मिला, तो वर्षों से अधूरी पड़ी यह मांग पूरी हो सकती है और नगर पालिका कन्या पाठशाला अपनी वास्तविक पहचान के साथ क्षेत्र की बेटियों के भविष्य को नई दिशा दे सकेगी।

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