प्रदेश सरकार एक ओर बरसात के मौसम को देखते हुए सड़कों को गड्ढामुक्त रखने और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निर्देश जारी कर रही है, वहीं गंजडुंडवारा नगर पालिका प्रशासन इन आदेशों को धरातल पर लागू कराने में पूरी तरह नाकाम नजर आ रहा है। कस्बे के सबसे व्यस्त नगर पालिका चौराहे के समीप बरसात मे फुटपाथ धंसने से बना गहरा गड्ढा बुधवार को पूरे दिन हादसों को न्योता देता रहा। सुबह से लेकर देर शाम तक कई वाहन इस गड्ढे में फंसते रहे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
नगर पालिका चौराहा कस्बे का प्रमुख यातायात केंद्र है। इसी मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग, स्कूली बच्चे, व्यापारी, ई-रिक्शा, बाइक और चारपहिया वाहन गुजरते हैं। वही बरसात से फुटपाथ धंसने से बना गड्ढा अब इतना बड़ा हो चुका है कि हल्की सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। बुधवार को कई वाहन गड्ढे में धंस गए, जिन्हें स्थानीय लोगों ने धक्का लगाकर और काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला। इसके बावजूद नगर पालिका प्रशासन की ओर से न तो बैरिकेडिंग कराई गई और न ही कोई चेतावनी संकेत लगाए गए।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह गड्ढा नगर पालिका कार्यालय से अधिक दूरी पर भी नहीं है। इसके बावजूद पूरे दिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने इसकी सुध लेना जरूरी नहीं समझा। लोगों का कहना है कि यदि रात में कोई बाइक सवार या ई-रिक्शा चालक इस गड्ढे की चपेट में आ जाए तो बड़ा हादसा हो सकता है।
जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश की सड़कें गड्ढामुक्त रहें और जहां भी सड़क या फुटपाथ क्षतिग्रस्त हो, वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए। बरसात के मौसम में विशेष निगरानी रखने और जलभराव व धंसी सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराने के भी आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद गंजडुंडवारा में नगर पालिका प्रशासन की कार्यशैली इन निर्देशों की अनदेखी करती दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन केवल कागजी दावों तक सीमित है। जमीनी हकीकत यह है कि कस्बे के मुख्य चौराहे पर बना यह गड्ढा लोगों की जान जोखिम में डाल रहा है। यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई और कोई अप्रिय घटना घट गई, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर पालिका चौराहे पर बने इस जानलेवा गड्ढे की तत्काल मरम्मत कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा बरसात के मौसम में पूरे कस्बे की सड़कों और फुटपाथों का विशेष सर्वे कराकर संभावित दुर्घटनाओं को रोका जाए।
अब सवाल यह है कि क्या नगर पालिका प्रशासन मुख्यमंत्री के गड्ढामुक्त अभियान को गंभीरता से लेगा, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाएगी।