उत्तर प्रदेश गौ-सेवा आयोग के सदस्य रमाकांत उपाध्याय ने शनिवार को जिले की प्रमुख गौशालाओं का औचक निरीक्षण कर गौवंश के संरक्षण एवं देखभाल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने राल स्थित ब्रह्मऋषि श्री देवराह बाबा गो-आश्रय स्थल, वृंदावन स्थित मदन गोपाल गौशाला और इस्कॉन गौशाला का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों एवं गौशाला प्रबंधन को गर्मी और आगामी बरसात के मौसम को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान आयोग के सदस्य ने गौवंश के लिए बनाए गए शेड, स्वच्छता व्यवस्था, पेयजल की उपलब्धता, हरे चारे, भूसा भंडारण तथा पोषण संबंधी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और बरसात के मौसम में गौवंश को लू, जलभराव और संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम समय रहते पूरे किए जाएं।
राल स्थित ब्रह्मऋषि श्री देवराह बाबा गो-आश्रय स्थल में उन्होंने करीब 10 एकड़ क्षेत्र में उगाई गई नैपियर घास का भी अवलोकन किया। उन्होंने इसे गौवंश के लिए हरे चारे की दिशा में सराहनीय पहल बताया। साथ ही गौशाला परिसर में केंचुआ खाद (वर्मी कम्पोस्ट) निर्माण की व्यवस्था का निरीक्षण कर इसकी उपयोगिता पर भी चर्चा की।
निरीक्षण के दौरान उन्हें गौ उत्पाद केंद्र की जानकारी दी गई, जहां गोबर और गौमूत्र से धूपबत्ती, साबुन, फेसवॉश, दीपक, घी, फिनायल सहित विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने गौशाला प्रबंधन से इन उत्पादों के उत्पादन और विपणन की जानकारी लेते हुए ऐसे प्रयासों को आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
आयोग के सदस्य ने मौजूद कर्मचारियों और प्रबंधन से गौवंश के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण तथा बीमार पशुओं के उपचार की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी गौवंश को पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध कराया जाए और उनके पोषण में किसी प्रकार की कमी न रहने पाए।
उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान गौशालाओं में जलभराव रोकने, शेडों को सुरक्षित रखने और साफ-सफाई बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाए। गौवंश की सेवा और संरक्षण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।