नगर पालिका के जेई (निर्माण) के बयान के बाद उठे सवाल, मानकों से ज्यादा मांगों को मिली प्राथमिकता
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
नगर पालिका परिषद गंजडुंडवारा द्वारा नगर में बनाए गए स्पीड ब्रेकरों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका के जेई (निर्माण) हेमंत कुमार का बयान इस मामले में कई सवाल खड़े कर रहा है। जेई (निर्माण) ने बताया कई स्थानों पर स्पीड ब्रेकर आवश्यकता के आधार पर नहीं, बल्कि सभासदों की मांग पर बनाए गए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब नगर में मानकों के विपरीत बने स्पीड ब्रेकरों के कारण लगातार हादसे सामने आ रहे हैं।
इस संबंध में बातचीत के दौरान जेई (निर्माण) हेमंत कुमार ने बताया कि नगर में स्पीड ब्रेकरों का निर्माण सभासदों की मांग के अनुरूप कराया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर आवश्यकता नहीं होने के बावजूद भी स्पीड ब्रेकर बनाए गए, क्योंकि संबंधित सभासदों की मांग थी।
जेई (निर्माण) के इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या सड़क सुरक्षा से जुड़े तकनीकी मानकों और यातायात विशेषज्ञों की राय से अधिक प्राथमिकता जनप्रतिनिधियों की मांगों को दी गई? यदि किसी स्थान पर स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता नहीं थी, तो फिर सार्वजनिक धन खर्च कर उनका निर्माण क्यों कराया गया? साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या निर्माण से पहले किसी तकनीकी सर्वे या यातायात मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्पीड ब्रेकरों का निर्माण केवल मांग के आधार पर नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के निर्धारित मानकों और वास्तविक आवश्यकता के अनुसार होना चाहिए। बिना तकनीकी परीक्षण और मानकों का पालन किए बनाए गए स्पीड ब्रेकर अब लोगों के लिए परेशानी और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
वैसे सोमवार सुबह मोहल्ला धनपाल मार्ग पर बने ऐसे ही स्पीड ब्रेकरों के कारण सुदामापुरी रोड निवासी अरविंद गुप्ता दूध लेने जाते समय हादसे का शिकार हो गए थे। लगातार ऊंचे स्पीड ब्रेकरों से गुजरते समय उनकी साइकिल एक ब्रेकर पर असंतुलित होकर गिर गई। हादसे में साइकिल का आगे का चिमटा टूट गया और अरविंद गुप्ता के सिर में चोट आई। स्थानीय लोगों ने उन्हें ई-रिक्शा से चिकित्सक के यहां पहुंचाकर उपचार कराया।
घटना के बाद नगरवासियों ने नगर के सभी स्पीड ब्रेकरों की तकनीकी जांच कराकर मानकों के विपरीत बने ब्रेकरों को हटाने तथा भविष्य में केवल आवश्यकता और निर्धारित मानकों के अनुसार ही स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग की है। साथ ही लोगों का कहना है कि यदि किसी स्थान पर स्पीड ब्रेकर की आवश्यकता नहीं थी, तो केवल मांग के आधार पर उनका निर्माण कराया जाना सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी धन, दोनों पर सवाल खड़े करता है।