वाटर कूलरों पर नहीं दर्ज सफाई की तारीख, कुछ की टंकियां गायब; पालिका की शुद्ध पेयजल व्यवस्था और रखरखाव पर उठे गंभीर सवाल
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। नगर पालिका परिषद द्वारा आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर लगाए गए वाटर कूलर अब स्वयं लोगों की सेहत के लिए खतरा बनते नजर आ रहे हैं। नगर में लगे अधिकांश वाटर कूलरों पर न तो सफाई की अंतिम तिथि अंकित है और न ही सर्विसिंग का कोई रिकॉर्ड प्रदर्शित किया गया है। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर वाटर कूलरों की टंकियां तक गायब हैं, जबकि कुछ उपकरण खराब हालत में पड़े हुए हैं।
गर्मी के मौसम में प्रतिदिन सैकड़ों लोग इन वाटर कूलरों से पानी पीते हैं। ऐसे में यदि टैंकों की नियमित सफाई नहीं हो रही है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक बिना सफाई वाले पानी के टैंकों में बैक्टीरिया, काई (Algae), फंगस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं, जो डायरिया, टाइफाइड, हैजा, पेट संक्रमण और अन्य जलजनित बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि नगर पालिका द्वारा संचालित इन सार्वजनिक पेयजल केंद्रों पर कहीं भी यह जानकारी उपलब्ध नहीं है कि संबंधित वाटर कूलर की आखिरी बार सफाई कब हुई थी, पानी की गुणवत्ता की जांच कब कराई गई थी और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किस कर्मचारी या एजेंसी के पास है। ऐसे में आमजन बिना किसी जानकारी के वही पानी पीने को मजबूर हैं।
स्थानीय नागरिकों अखिल,अमित एवं नामित सभासद राम प्रताप चौहान एवं उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष राम कुमार गुप्ता का कहना है कि नगर पालिका को केवल वाटर कूलर लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेने के बजाय उनकी नियमित सफाई, क्लोरीनेशन, पानी की जांच और सर्विसिंग सुनिश्चित करनी चाहिए। प्रत्येक वाटर कूलर पर सफाई तिथि, अगली सर्विसिंग की तारीख तथा जिम्मेदार अधिकारी का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।
सामुदायक स्वास्थ्य केन्द्र अधीक्षक डाo आकाश का कहना है कि सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े स्तर पर बीमारी फैलने का कारण बन सकती है। ऐसे में आमजन प्रेयजल हेतु तत्काल सभी वाटर कूलरों का निरीक्षण कराकर उनकी सफाई और पानी की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर के लोग इन्हीं वाटर कूलरों का पानी पी रहे हैं, तो उनकी स्वच्छता और सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन तय करेगा? यदि किसी लापरवाही के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी? जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर नगर पालिका प्रशासन को जवाब देना होगा।