पोस्टमार्टम हाउस के बाहर दादा के नम आंखो से बताया था, 20 साल में तीसरी बड़ी वारदात का दर्द; अब खुलासे के बाद भी कई सवाल बरकरार
जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा। गांव बहारपुर की चार वर्षीय मासूम आरोही हत्याकांड का पुलिस ने भले ही खुलासा कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया हो, लेकिन इस पूरे मामले के केंद्र में पीड़ित परिवार का दर्द, उनके आरोप और वर्षों से चली आ रही रंजिश की कहानी है। पुलिस के खुलासे के बाद अब उन बयानों की भी चर्चा तेज हो गई है, जो बच्ची का शव मिलने के समय परिजनों ने दिए थे।
9 जून को जब तीन दिन से लापता मासूम आरोही का शव गांव के पास खेत में मिला था, तब पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठे उसके दादा सुरेश की आंखों में आंसू और आवाज में बेबसी साफ झलक रही थी। सामने पोती का शव था और परिवार सदमे में डूबा हुआ था। उसी समय परिजनों ने कुछ लोगों पर शक जताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए थे।
"कहा था- कल बच्ची मिल जाएगी, जिंदा या मुर्दा"
आरोही के ताऊ ने उस समय आरोप लगाया था कि गांव के एक पूर्व प्रधान ने 8 जून को आकर कहा था— "कल तुम्हारी बच्ची मिल जाएगी, जिंदा या मुर्दा।" परिजनों का दावा था कि अगले ही दिन मासूम का शव बरामद हो गया। इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक चर्चाओं में ला दिया था।
अब पुलिस जांच में सामने आया है कि वर्ष 2021 के ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश को लेकर साजिश रची गई थी और इसी रंजिश के चलते मासूम को निशाना बनाया गया। पुलिस ने मामले में कमलेश शाक्य को गिरफ्तार कर उसे घटना का मास्टरमाइंड बताया है, जबकि एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है।
20 साल में तीसरी बड़ी वारदात का दर्द
पीड़ित परिवार का कहना है कि बीते दो दशकों में उनके साथ यह तीसरी बड़ी घटना है। सुरेश के अनुसार करीब 20 वर्ष पहले होली के दौरान हुए विवाद में उनके परिवार के लोगों के साथ मारपीट हुई थी और उनकी झोपड़ी तक फूंक दी गई थी। मामला दर्ज हुआ, लेकिन बाद में समझौते की भेंट चढ़ गया।
परिजनों का यह भी आरोप है कि लगभग पांच वर्ष पहले सुरेश के छोटे भाई राकेश की हत्या कर शव रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया था। उनका दावा है कि हत्या कुल्हाड़ी से की गई थी, लेकिन वह मामला भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सका।
"गांव में रहने से लगता है डर"
परिवार का कहना है कि गांव में अनुसूचित जाति के केवल दो परिवार हैं, जबकि अन्य जातियों का बहुलता है। ऐसे में वे खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। मासूम की हत्या के बाद उनका डर और बढ़ गया है।
परिजनों ने यहां तक कहा कि यदि सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती तो सरकार उन्हें किसी अन्य स्थान पर बसाने पर विचार करे। उनका कहना है कि अब गांव में रहना मुश्किल लगने लगा है।
खुलासे के बाद न्याय की उम्मीद
पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी कमलेश शाक्य को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या के पीछे चुनावी रंजिश को वजह बताया है। हालांकि परिवार का कहना है कि असली न्याय तभी मिलेगा जब मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी हो और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिले।
आरोही की मौत ने सिर्फ एक परिवार की खुशियां नहीं छीनीं, बल्कि बहारपुर गांव में वर्षों से चली आ रही रंजिश, भय और सामाजिक तनाव की परतों को भी उजागर कर दिया है। अब पूरे क्षेत्र की नजर इस बात पर टिकी है कि अदालत में यह मामला किस अंजाम तक पहुंचता है और मासूम आरोही को न्याय कब मिलता है।