यमुना तटवर्ती क्षेत्र होने के कारण जलजनित आपदाओं की संभावनाओं को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बुधवार को सिविल नाविकों एवं गोताखोरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। प्रशिक्षण में जल दुर्घटनाओं के दौरान बचाव कार्य, सुरक्षित नाव संचालन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि मथुरा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय लोग यमुना घाटों पर आते हैं। ऐसे में नाविकों और गोताखोरों की जिम्मेदारी केवल नाव संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 8वीं वाहिनी, गाजियाबाद की विशेषज्ञ टीम ने प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन की मूलभूत जानकारी दी। टीम ने जल आपदाओं में खोज एवं बचाव (सर्च एंड रेस्क्यू), प्राथमिक उपचार, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, सुरक्षित नाव संचालन और बचाव उपकरणों के उपयोग की तकनीक समझाई।
डैम्पियर नगर स्थित पांचजन्य प्रेक्षागृह में आयोजित सैद्धांतिक सत्र के बाद प्रतिभागियों को वृंदावन के केशीघाट तथा मथुरा के विश्रामघाट और बंगालीघाट पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। एनडीआरएफ के जवानों ने जल बचाव अभियान का प्रदर्शन करते हुए लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय और अन्य सुरक्षा उपकरणों के उपयोग की जानकारी दी। नाविकों और गोताखोरों ने स्वयं भी अभ्यास कर तकनीकों को समझा।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने नाविकों को सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नाव में प्राथमिक उपचार किट, लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध होने चाहिए। नाविकों को वैध लाइसेंस और पहचान पत्र साथ रखने तथा यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा संबंधी जानकारी देने को कहा गया।
उन्होंने नाविकों को अपने मोबाइल फोन में दामिनी और सचेत एप डाउनलोड करने की सलाह दी, ताकि मौसम और आपदा संबंधी अलर्ट समय पर प्राप्त हो सकें। साथ ही मौसम की जानकारी लेते रहने, संचार उपकरण रखने और नावों का नियमित रखरखाव करने पर भी जोर दिया।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना, खराब मौसम में नाव संचालन करना, नशे की हालत में नाव चलाना और प्रतिबंधित क्षेत्रों में नाव ले जाना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों से बचना सभी नाविकों की जिम्मेदारी है। नावों पर अधिक भार न हो और पशुओं के साथ यात्रियों को न बैठाया जाए, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाए।
उन्होंने बताया कि नाविकों और यात्रियों के लिए बीमा सुविधा उपलब्ध है तथा नाविकों एवं गोताखोरों के हितों की रक्षा के लिए नाविक कल्याण समिति का भी गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आगंतुकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सिविल नाविकों और गोताखोरों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी और व्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों और एनडीआरएफ के अधिकारियों ने भी सहभागिता की।