आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज का दावा करने वाले निजी अस्पतालों की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पीलीभीत बाईपास स्थित एक निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्डधारी मरीज से इलाज के नाम पर 22,773 रुपये वसूलने का मामला सामने आया है। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत पहुंची तो जांच बैठी और अस्पताल प्रबंधन की पोल खुल गई। आरोप सही पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को तीन दिन के भीतर पूरी रकम लौटाने का फरमान जारी कर दिया है।
पीलीभीत जिले के न्यूरिया थाना क्षेत्र के ग्राम संडा निवासी भगवत सरन ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनकी परिजन नन्ही देवी को 15 मई को पीलीभीत बाईपास स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज आयुष्मान कार्डधारी थी, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल ने इलाज के नाम पर नकद रकम वसूल ली। शिकायतकर्ता ने भुगतान से जुड़ी रसीदें भी विभाग को उपलब्ध कराईं।
शिकायत के बाद जिला शिकायत निवारण अधिकारी, आयुष्मान भारत योजना की ओर से मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि भर्ती के समय मरीज के परिजनों से यह लिखवाया गया था कि उनके पास आयुष्मान कार्ड उपलब्ध नहीं है। बाद में जब कार्ड प्रस्तुत किया गया तो मरीज को योजना के तहत शामिल कर लिया गया, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल ने विभिन्न मदों में कुल 22,773 रुपये की वसूली कर ली।
जांच रिपोर्ट में शिकायत को सही पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन पर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने अस्पताल को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि तीन दिन के भीतर वसूली गई पूरी राशि मरीज पक्ष को वापस की जाए और भुगतान का साक्ष्य विभाग को उपलब्ध कराया जाए।
सीएमओ ने स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि आयुष्मान योजना के लाभार्थियों से अवैध वसूली किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य में इस तरह की शिकायत दोबारा मिली तो संबंधित अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में पात्र मरीजों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में लाभार्थियों से नकद वसूली योजना के नियमों का सीधा उल्लंघन मानी जाती है। विभाग की कार्रवाई के बाद निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के पालन को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।