महिलाओं में तेजी से बढ़ रही ओवेरियन कैंसर की समस्या को डॉक्टर “साइलेंट किलर” मान रहे हैं। इसकी वजह यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद सामान्य दिखाई देते हैं और अधिकतर महिलाएं इन्हें नजरअंदाज कर देती हैं। समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी अक्सर एडवांस स्टेज में पकड़ में आती है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार पेट फूलना, पेल्विक दर्द, कम खाने पर भी पेट भरा महसूस होना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन घटना या बढ़ना ओवेरियन कैंसर के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें गैस, हार्मोनल बदलाव या पीरियड्स से जुड़ी सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देती हैं।
Max Super Speciality Hospital के फीमेल यूरोलॉजी, गायने-ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट Dr. Dweep Jindal ने बताया कि करीब 70 में से एक महिला को जीवनकाल में ओवेरियन कैंसर होने की आशंका रहती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और उन महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा होता है, जिनके परिवार में ब्रेस्ट, ओवेरियन या कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास रहा हो।
उन्होंने बताया कि अब ओवेरियन कैंसर के इलाज में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। प्रिसिशन मेडिसिन, मिनिमली इनवेसिव सर्जरी और टार्गेटेड थेरेपी के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। आमतौर पर इलाज में सर्जरी और कीमोथेरेपी का संयोजन किया जाता है, जिसे मरीज की स्थिति और कैंसर की स्टेज के अनुसार तय किया जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार साइटो-रिडक्टिव या डिबल्किंग सर्जरी इलाज का अहम हिस्सा है, जिसमें शरीर से अधिकतम ट्यूमर हटाने की कोशिश की जाती है। अब यह सर्जरी एडवांस तकनीकों से की जा रही है, जिससे मरीज जल्दी रिकवर हो रहे हैं और जटिलताओं का खतरा भी कम हो रहा है।
विशेषज्ञों ने बताया कि सर्जरी के बाद प्लेटिनम-बेस्ड कीमोथेरेपी दी जाती है, ताकि बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म किया जा सके। इसके अलावा PARP inhibitors जैसी टार्गेटेड थेरेपी BRCA mutation वाले मरीजों में बेहतर परिणाम दे रही है।
डॉ. जिंदल के मुताबिक एडवांस एब्डॉमिनल कैंसर में HIPEC तकनीक भी प्रभावी साबित हो रही है। इससे मरीजों की सर्वाइवल रेट और जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है। वहीं भविष्य में मां बनने की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए Fertility Sparing Surgery एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इम्यूनोथेरेपी और इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी जैसी नई तकनीकों पर लगातार शोध चल रहा है, जो एडवांस और दोबारा लौटने वाले ओवेरियन कैंसर मरीजों के लिए नई उम्मीद साबित हो सकती हैं।