मुकदमे की धाराओं में हेराफेरी करना पुलिस का पुराना खेल है। सीबीगंज थाने के दो दरोगा और मुंशी का ऐसा ही एक कारनामा सामने आया है। आरोपियों को बचाने के लिए मुकदमे में दुष्कर्म की धारा नहीं लगाई गई। पीड़िता की शिकायत पर एसएसपी ने जांच कराई तो हकीकत सामने आ गई। इस पर एसएसपी अनुराग आर्य ने आरोपों के बावजूद उचित धाराएं न लगाने पर दोनों दरोगा और मुंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
बरेली के एसएसपी अनुराग आर्या ने बताया पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसके साथ शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया गया। शिकायत मिलने के बाद सीबीगंज थाना पुलिस ने मामले की जांच की। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन दुष्कर्म की धाराएं नहीं लगाईं।
इस पर पीड़िता ने मामले की शिकायत एसएसपी अनुराग आर्य से की। एसएसपी ने मामले की जांच कराई तो आरोप सही पाया गया। जांच में पता चला कि तत्कालीन हेड कांस्टेबल प्रवीण कुमार ने तहरीर में स्पष्ट रूप से दिए गए तथ्यों को छिपाते हुए मुकदमे में दुष्कर्म की आवश्यक धाराएं शामिल नहीं कीं।
इसके अलावा दरोगा रत्नेश कुमार और सचिन चौधरी ने विवेचना के दौरान विधिसम्मत कार्रवाई नहीं की और मुकदमे में आवश्यक धाराओं को शामिल नहीं किया। जांच में सामने आया कि पीड़िता के आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया गया और प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी अनुराग आर्य ने दरोगा रत्नेश कुमार व सचिन चौधरी और हेड कांस्टेबल प्रवीण कुमार कोकर्तव्यहीनता का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।