जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे कासगंज के निलंबित सर्विलांस प्रभारी इंस्पेक्टर प्रेमपाल सिंह और एसओजी प्रभारी दरोगा विनय कुमार शर्मा को अदालत से बड़ा झटका लगा है। एडीजे विशेष (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) न्यायालय अलीगढ ने दोनों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
मामला सहावर क्षेत्र के सर्राफा व्यापारी अजय वर्मा से जुड़ा है, जिन्हें चोरी का माल खरीदने के आरोप में एसओजी टीम द्वारा उठाया गया था। आरोप है कि बाद में पुलिसकर्मियों ने उनसे कथित तौर पर मोटी रिश्वत लेकर छोड़ दिया। पीड़ित ने इस संबंध में थाना पटियाली में मुकदमा दर्ज कराया था।
दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, 20 जुलाई 2025 को एसओजी टीम अजय वर्मा को अपने साथ ले गई। टीम के साथ मौजूद एक कथित चोरी के आरोपी ने पुलिस के सामने बयान दिया कि उसने चोरी का माल अजय को बेचा है। इसके बाद अजय को पटियाली थाने लाया गया, जहां पूछताछ के दौरान उसने खुद को निर्दोष बताते हुए रंजिश में फंसाए जाने की बात कही।
आरोप है कि देर रात करीब तीन बजे पुलिस ने अजय को साढ़े तीन लाख रुपये और चोरी गए जेवरात के बदले नए जेवरात लेकर छोड़ दिया। इस मामले में पटियाली कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी, एसओजी के दो सिपाही सहित अन्य के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमे दोषी पाए जाने पर एसओजी के दो सिपाही पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं, जिन्हें बाद में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। लेकिन दर्ज मुकदमे एवं विवेचना मे खेल कर अन्य आरोपियो को बचा दिया गया।
जिसके बाद पीड़ित अजय वर्मा द्वारा विवेचना मे भ्रष्ट्राचार की डीजीपी से शिकायत के बाद मामले की विवेचना में तेजी आई। जांच के दौरान तत्कालीन कोतवाली प्रभारी रामवकील, इंस्पेक्टर प्रेमपाल सिंह और दरोगा विनय कुमार शर्मा के नाम भी सामने आए। इसके बाद तीनों बिना सूचना जनपद से फरार हो गए, जिस पर विभाग ने सभी को निलंबित कर दिया।
इसी क्रम में प्रेमपाल सिंह और विनय कुमार शर्मा ने अलीगढ़ मंडल स्तर पर स्थापित भ्रष्टाचार निवारण अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी, जिसे न्यायालय ने खारिज कर दिया। अब दोनों आरोपियों के पास राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।