जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
जनपद के सहावर थाना क्षेत्र के गांव चहका गुनार में मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर निकाली जा रही शोभायात्रा के दौरान हुआ बवाल पुलिस-प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर गया है। तय रूट, पूर्व विवाद और शांति समिति की बैठक के बावजूद हालात जिस तरह बिगड़े, उसने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
क्या है पूरा मामला
गांव मे दोपहर करीब 2:45 बजे शुरू हुई शोभायात्रा जब 3:30 बजे गांव की एक गली में पहुंची, तो आरोप है कि एक जाति विशेष के लोगों ने पहले से ट्रैक्टर, थ्रेशर, बुग्गी और अन्य वाहन आड़े-तिरछे खड़े कर रास्ता रोक दिया। पुलिस ने जब रास्ता खुलवाने की कोशिश की, तभी छतों से अचानक ईंट-पत्थरों की बारिश शुरू हो गई।
देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और करीब डेढ़ घंटे तक लगातार पथराव होता रहा। इस दौरान सहावर थाने में तैनात सिपाही अश्वनी मलिक घायल हो गए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी हालात संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन शुरुआती स्तर पर स्थिति काबू से बाहर नजर आई।
सूचना मिलते ही एएसपी सुशील कुमार, एडीएम दिग्विजय सिंह, एसडीएम एसएन त्रिपाठी और सीओ शाहिदा नसरीन कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। बाद में डीएम प्रणय सिंह और एसपी ओपी सिंह भी गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
पहले से लिखी थी बवाल की पटकथा
तस्वीरे बया कर रही है एवं जो तथ्य सामने आए हैं, वे प्रशासनिक और खुफिया तंत्र की विफलता की ओर इशारा करते हैं। गली में पहले से वाहन खड़े कर रास्ता अवरुद्ध करना और छतों पर ईंट-पत्थरों का जमा होना इस बात के संकेत हैं कि उपद्रव की तैयारी पहले से की गई थी।
वैसे भी जानकारी के अनुसार करीब 30 साल पहले भी इसी गांव में शोभायात्रा के मार्ग को लेकर विवाद हुआ था।
ऐसे मे सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि जब शोभायात्रा का मार्ग पूर्व निर्धारित था, और आयोजन से पहले पीस कमेटी की बैठक भी हो चुकी थी, तो फिर प्रशासन ने संवेदनशील बिंदुओं पर पर्याप्त सतर्कता क्यों नहीं बरती।
जबकि विवाद का इतिहास, तय मार्ग और पूर्व बैठकें सब मौजूद थीं, तो फिर खुफिया तंत्र और प्रशासनिक सतर्कता क्यों नाकाम रही। क्या यही चूक इस बड़े बवाल की असली वजह बनी।
देरी से एक्शन बना बड़ा कारण
वही सवाल यह भी उठ रहे है कि पथराव के बाद देरी करते हुए शाम 6:10 बजे पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उपद्रवियों को क्यो खदेड़ा। क्यों कि यदि समय रहते सख्ती दिखाई जाती, तो हालात इतने नहीं बिगड़ते।
वैसे तो स्थिति नियंत्रित होने के बाद मंगलवार रात करीब 7 बजे डीएम और एसपी की मौजूदगी में उसी मार्ग से शोभायात्रा को दोबारा निकाला गया और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया। लेकिन घटना प्रशानिक विफलता के सवाल छोड गई है।
अब तक की प्रशासनिक कार्यवाही
एसपी ओपी सिंह ने कहा है कि प्रथम दृष्टया मामला जानबूझकर मार्ग अवरुद्ध करने और पुलिस पर पथराव का प्रतीत होता है। पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।
वही कोतवाली पुलिस के अनुसार मामले मे 23 नामजद और 15 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अब तक 5 महिलाओ सहित कुल 18 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।