जागरण टुडे, कासगंज(उदित विजयवर्गीय)
गंजडुंडवारा कोतवाली क्षेत्र स्थित ग्राम सिकहरा में उस वक्त एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब एक साधारण से स्वप्न ने पूरे गांव की आस्था को एक नए अध्याय से जोड़ दिया। यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और चमत्कार का ऐसा संगम है, जिसने हर किसी को हैरान भी किया और भावविभोर भी।
जानकारी के अनुसार गांव के निवासी एवं मंदिर संरक्षक राजकिशोर मिश्रा को 16 फरवरी की रात एक दिव्य स्वप्न आया। स्वप्न में उन्हें पास के गांव रंजीतपुर की भूड़ में स्थित दो विशाल पीपल वृक्षों के बीच एक प्राचीन कुएं के समीप भगवान हनुमान के दूसरे स्वरूप के विराजमान होने का संकेत मिला। सुबह होते ही इस स्वप्न को ईश्वरीय आदेश मानकर उन्होंने पुजारी और ग्रामीणों के साथ बताए गए स्थान पर खुदाई शुरू कराई।
जैसे-जैसे फावड़ा जमीन को चीरता गया, वैसे-वैसे लोगों की धड़कनें भी तेज होती गईं और फिर अचानक मिट्टी के नीचे से निकला एक पत्थर, जो साधारण नहीं था। जब उसे साफ किया गया, तो उस पर उभरी आकृति ने सभी को स्तब्ध कर दिया। मूंछ और दाढ़ी के साथ स्पष्ट मानव स्वरूप, जिसे ग्रामीणों ने तुरंत हनुमान जी का सालासर स्वरूप मान लिया।
इस अद्भुत घटना ने पूरे गांव में आस्था की लहर दौड़ा दी। लोगों ने इसे कोई संयोग नहीं, बल्कि हनुमान जी की विशेष कृपा और दिव्य संकेत माना। खास बात यह भी है कि जिस स्थान पर वर्तमान मंदिर है, वहीं वर्षों पहले भी हनुमान जी की प्रतिमा भूमि से प्रकट हुई थी। अब उसी पवित्र धरा पर पुनः प्रतिमा का मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा।
वैसे हनुमान जयंती के शुभ अवसर पर इस दिव्य प्रतिमा की स्थापना हेतु भव्य मंदिर निर्माण की शुरुआत की गई। पंडित कमलेश कुमार मिश्रा द्वारा विधि-विधान से भूमि पूजन संपन्न कराया गया। पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार, श्रद्धा और भक्ति की गूंज सुनाई दी। इस पावन मौके पर वंदना मिश्रा, गंगाराम, केदारीलाल, अमर सिंह माथुर, श्यामपाल, चन्द्रपाल शंखवार, अनमोल माथुर, राजीव माथुर, शांतनु मिश्रा समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
मंदिर आस्था की अनोखी पहचान
ग्राम सिकहरा का यह प्राचीन हनुमान मंदिर पहले से ही क्षेत्र में चमत्कारिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां स्थापित वर्तमान प्रतिमा भी वर्षों पूर्व भूमि से ही प्रकट हुई थी। तभी से यह स्थल श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और मनोकामना पूर्ति का केंद्र बना हुआ है। यहाँ मंगलवार व शनिवार के दिन भक्तो को ताता लगता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देशभर में कई स्थानों पर देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्वप्न या दिव्य संकेतों के माध्यम से प्राप्त हुई हैं। राजस्थान के प्रसिद्ध सालासर धाम की तरह, जहां खेत में खुदाई के दौरान हनुमान जी की मूर्ति मिली थी, ठीक उसी तरह सिकहरा में भी यह घटना लोगों के लिए आस्था का जीवंत प्रमाण बन गई है।