इमो एआई वो कहता है जो आप सुनना चाहते है, बेहद घातक हो सकती है इमोशनल एआई
शहरों के साथ अब छोटे कस्बों में भी युवा ब्रेकअप, डर, चिंता और खौफ जैसी भावनात्मक स्थितियों में इमोशनल एआई चैटबॉट्स का सहारा लेने लगे हैं। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। कई लोग इसके लती हो चुके है, जिनको काउंसिलिंग के माध्यम से समझाया जाता है।
सही-गलत का आकलन किए बगैर एआई की बात सही मान रहे लोग
बरेली जिला अस्पताल में स्थित मन कक्ष प्रभारी मनोचिकित्सक डॉ आशीष सिंह के अनुसार इमोशनल एआई यूजर को वही जवाब देता है, जो वह सुनना चाहता है। ऐसे में युवा सही-गलत का आकलन किए बिना एआई की बातों को मानने लगते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि एआई खुद ही बातचीत को आगे बढ़ाता है, जिससे यूजर की उस पर निर्भरता और बढ़ जाती है।
गंभीर खतरा बन सकता है इमोशनल एआई
डॉक्टरों के मुताबिक आने वाले समय में इमोशनल एआई एक गंभीर खतरा बन सकता है। यह न केवल युवाओं को वास्तविक सामाजिक संबंधों से दूर कर रहा है, बल्कि उनमें फेक वैलिडेशन की आदत भी विकसित कर रहा है। इस कारण कई युवा वास्तविक दुनिया की समस्याओं से भागकर डिजिटल दुनिया में सुकून तलाशने लगे हैं।
मन कक्ष में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण युवाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षण बढ़े हैं। हालांकि काउंसलिंग के जरिए इनमें सुधार भी देखा जा रहा है।
क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
इमोशनल एआई चैटबॉट्स के कारण कई युवा वैलिडेशन की तलाश में एडिक्शन जैसा व्यवहार दिखा रहे हैं। युवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के बजाय वास्तविक रिश्तों और शारीरिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, ताकि उन्हें सच्ची सहानुभूति और संतुलित जीवन मिल सके।- डॉ. आशीष सिंह, मन कक्ष प्रभारी
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