Thursday, April 2, 2026

मथुरा: भागवत मंचों से सुनाई देगा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का शंखनाद

लेखक: Jagran Today | Category: उत्तर प्रदेश | Published: March 29, 2026

मथुरा:  भागवत मंचों से सुनाई देगा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति का शंखनाद

कथा वाचकों को भेजा जा  मंदिर तोड़ने का इतिहास : महेंद्र प्रताप 

जागरण टुडे, वृंदावन

श्रीकृष्ण जन्मभूमि को कब्जा मुक्त कर वहां भव्य मंदिर निर्माण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब तेज होता नजर आ रहा है। इस प्रकरण के हिंदू पक्षकार एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने स्पष्ट कहा कि हिंदू समाज को अब एकजुट होकर आगे आना होगा, तभी भगवान श्रीकृष्ण के वास्तविक गर्भगृह स्थल पर पुनः मंदिर निर्माण संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए अब भागवत कथाओं के मंच से भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का उद्घोष गूंजेगा। महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सभी भागवताचार्यों को श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक तथ्य और दस्तावेज भेजे जा रहे हैं, ताकि वे इस विषय को अपने-अपने अनुयायियों तक पहुंचा सकें। उनका कहना है कि इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाकर इसे व्यापक जन आंदोलन का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि भागवताचार्यों और धर्माचार्यों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और उनसे आग्रह किया जा रहा है कि वे अपने मंचों से इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएं।

भागवत कथा के दौरान यह मुद्दा उस समय और प्रमुखता से सामने आया, जब बृजरत्न बृजवासी जगद्गुरु आनंदमूर्ति संत श्री कृष्ण कन्हैया पद रेणु जी महाराज की कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। महेंद्र प्रताप सिंह ने उपस्थित लोगों से संवाद करते हुए पूछा कि कितने लोग श्रीकृष्ण जन्मभूमि जा चुके हैं, जिस पर अधिकांश लोगों ने हाथ उठाकर अपनी आस्था व्यक्त की।

उन्होंने दावा किया कि वर्तमान में मंदिर के समीप स्थित मस्जिद ही भगवान श्रीकृष्ण का वास्तविक गर्भगृह स्थल है। उन्होंने कहा कि इतिहास में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को कई बार तोड़ा गया और अंतिम बार मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर ध्वस्त कर वहां मस्जिद का निर्माण कराया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर के विग्रह को आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगाया गया।

सभा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से सवाल किया कि क्या असली गर्भगृह स्थल हिंदुओं को मिलना चाहिए और क्या विग्रह वापस लाए जाने चाहिए, जिस पर लोगों ने समर्थन में हाथ उठाया।

महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस मामले में सबसे पहले उन्होंने ही हाईकोर्ट में वाद दायर किया, जो वर्तमान में विचाराधीन है। उनका कहना है कि हिंदू पक्ष के पास मजबूत साक्ष्य हैं, जबकि प्रतिवादी पक्ष अब तक कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका है।

उन्होंने कहा कि देश-विदेश की लाइब्रेरी से ऐतिहासिक ग्रंथों और राजस्व अभिलेखों का अध्ययन किया गया है, जिनमें कहीं भी मस्जिद होने का उल्लेख नहीं मिलता, बल्कि सभी साक्ष्य मंदिर के पक्ष में संकेत करते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुस्लिम साहित्यकारों के लेखन में भी मंदिर का उल्लेख मिलता है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान ढांचा स्वयं इस बात की गवाही देता है कि मंदिर को तोड़कर गुंबद बनाया गया, जिसे मस्जिद बताया जा रहा है, जबकि वही भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल है।

उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले देश ही नहीं, बल्कि विश्वभर में इस मांग को लेकर आंदोलन चलाया जा रहा है और इसे व्यापक समर्थन मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कई भागवताचार्यों ने आश्वस्त किया है कि वे इस मुद्दे को अपने-अपने मंच से उठाएंगे।

अंत में उन्होंने हिंदू समाज से इस आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि समाज को यह तय करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को कैसा भारत देना है। उन्होंने कुछ संगठनों पर सनातन धर्म को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए सतर्क रहने की अपील की और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

No ads available.

Get In Touch

BDA COLONY HARUNAGLA, BISALPUR ROAD BAREILLY

+91 7017029201

sanjaysrivastav1972@gmail.com

Follow Us

© 2026 Jagran Today. All Rights Reserved.