अखिल भारतीय गौतम ब्राह्मण महासभा मथुरा के तत्वाधान में महर्षि गौतम का प्राकट्योत्सव महोली रोड स्थित ऋषि नगर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन धर्मदत्त गौतम के निवास पर किया गया। जहां बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत महर्षि गौतम के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। इसके बाद सभी ने एक-दूसरे को चंदन लगाकर हवन में आहुति दी और वातावरण को आध्यात्मिक बनाया। मुख्य अतिथि पूर्व सीडीओ राधेश्याम गौतम ने कहा कि महर्षि गौतम न्याय दर्शन के प्रवर्तक माने जाते हैं। उन्होंने भारतीय दर्शन को नई दिशा दी और वैदिक काल में मंत्र दृष्टा के रूप में भी उनकी विशेष पहचान रही। ऋग्वेद में उनके नाम से कई सूक्त मिलते हैं, जो उनके ज्ञान और योगदान को दर्शाते हैं।
विशिष्ट अतिथि जिला अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि महर्षि गौतम द्वारा रचित न्याय दर्शन भारतीय दर्शन की प्रमुख शाखा है। उन्होंने बताया कि त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना भी महर्षि गौतम से जुड़ी मानी जाती है, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
पूर्व प्राचार्य रामकृष्ण गौतम ने बताया कि गोदावरी नदी को गौतमी गंगा भी कहा जाता है, जो दक्षिण भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पन्नालाल गौतम ने की, जबकि संचालन धर्मदत्त गौतम ने किया।
इस अवसर पर तिलक राज गौतम, हरिमोहन गौतम, सीताराम पाठक, नेत्रपाल गौतम, भगवती प्रधान, सुभाष बाबू गौतम, नरेन्द्र कृष्ण गौतम सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में समाज में एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।