हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत् 2083 के शुभारम्भ पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मंदिरों में गुरुवार को पारंपरिक धार्मिक आयोजनों की धूम रही। नवसंवत्सर के आगमन के साथ ही पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का वातावरण देखने को मिला।
सुबह नवीन पताकाएं फहराकर नववर्ष का स्वागत किया गया। ध्वज परिवर्तन के बाद प्रातः 8 बजे अष्टभुजा भगवती श्री योगमाया जी का शास्त्रोक्त विधि से अभिषेक और पूजन संपन्न कराया गया। इसके उपरांत मंदिर के पूजाचार्यों द्वारा शतचंडी का सस्वर पाठ प्रारंभ किया गया, जिससे पूरा परिसर वैदिक मंत्रों की ध्वनि से गूंज उठा।
वहीं भागवत भवन स्थित श्री दुर्गा जी मंदिर और श्री रामजी मंदिर में विधिविधान के साथ कलश स्थापना की गई। इसके साथ ही श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ शुरू हुआ। व्यास बैजनाथ चतुर्वेदी के नेतृत्व में उनकी मंडली द्वारा प्रातः 9 बजे श्रीरामचरितमानस के नवान्ह पारायण पाठ का भी शुभारंभ किया गया।
नवसंवत्सर के इस पावन अवसर पर पूरे श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर को वंदनवारों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित किया गया। मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। भक्तों को विशेष रूप से निम्बचूर्ण प्रसाद वितरित किया गया।
इस मौके पर कपिल शर्मा, गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी और डॉ रोशन लाल ने सभी श्रद्धालुओं को नवसंवत्सर की मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नववर्ष भारतीय संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।