सूफीटोला क्षेत्र में अवैध निर्माण के आरोप में गुड लाइफ मैरिज हॉल और एवान-ए-फरहत बरातघर पर चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाइ्र को फिलहाल रोक दिया गया है। एवान-ए-फरहत बरातघर के मालिक द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सात दिनों की अंतरिम सुरक्षा देते हुए 10 दिसंबर तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश मिलते ही बीडीए और पुलिस टीम को कार्रवाई रोककर वापस लौटना पड़ा।
बरेली विकास प्राधिकरण पिछले दो दिनों से दोनों स्थलों पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई में जुटा था। गुरुवार सुबह भी बीडीए की टीम दो बुलडोज़र और पर्याप्त पुलिस बल के साथ सूफीटोला पहुंची। प्रारंभिक तैयारी के बाद टीम ने एवान-ए-फरहत के हिस्से को ढहाना शुरू किया ही था कि बरातघर के संचालक सरफराज वली खां अपने बेटे के साथ मौके पर पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट से मिले स्टे आदेश का हवाला दिया। अधिकारियों ने उन्हें आदेश की प्रति दिखाने को कहा और कुछ समय दिया।
इसके बाद बरातघर संचालक पक्ष के अधिवक्ता वैभव माथुर स्टे आदेश की कॉपी लेकर पहुंचे और बीडीए अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की। आदेश देखने के बाद अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई रोक दी। इसी आधार पर गुड लाइफ मैरिज हॉल पर भी ध्वस्तीकरण स्थगित किया गया, क्योंकि आसपास के मकान मालिकों ने कार्रवाई के दौरान अपने घरों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई थी।
करीब 12 बजकर 15 मिनट पर बीडीए टीम पूरी कार्रवाई स्थगित कर स्थल से वापस लौट गई। पुलिस ने चौराहे पर लगाई गई बैरिकेडिंग भी हटा दी और आवागमन फिर बहाल कर दिया। बीडीए अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए सात दिनों की अवधि में याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अग्रिम आदेश प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अधिवक्ता वैभव माथुर के अनुसार, बीडीए ने पुराने आदेशों के आधार पर नोटिस दिखाए बिना ध्वस्तीकरण शुरू किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है। बीडीए अधिकारियों का कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सरफराज बोले: बुलडोज़र बरातघर पर नहीं, मेरे सीने पर चला है
सूफीटोला में दो बरातघरों पर बीडीए की ध्वस्तीकरण कार्रवाई भले ही अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद रुक गई हो, लेकिन एवान-ए-फरहत के मालिक सरफराज वली खां का दर्द गुरुवार को साफ झलक उठा। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रशासन की कार्रवाई से उनका वर्षों पुराना इतिहास और भावनाएं टूट गईं। उन्होंने कहा कि बुलडोज़र बरातघर पर नहीं, मेरे सीने पर चला है।
स्टे आदेश की प्रति लेकर जब अधिवक्ता वैभव माथुर मौके पर पहुंचे, उसके कुछ ही समय बाद सरफराज वली खां भी मलबे के पास पहुंच गए। वहां पड़े मलबे में से एक ईंट उठाई और बताया कि उस पर 1942 की तिथि खुदी हुई है। उन्होंने कहा कि यह भवन आजादी से पहले बना था, और उसकी विरासत को एक झटके में तोड़ दिया गया। उन्होंने दावा किया कि बीडीए को उन्होंने आवश्यक दस्तावेज दिखाए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रही।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका या उनके परिवार का किसी भी विवादित व्यक्ति विशेषकर मौलाना तौकीर से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी कारण उनके प्रतिष्ठान को निशाना क्यों बनाया गया।
बुलडोज़र कार्रवाई से मोहल्ले में अव्यवस्था, पानी और ड्रेनेज की समस्या
पुराना शहर सूफीटोला के निवासी पिछले दो दिनों से ध्वस्तीकरण के कारण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बरातघरों के ढहे हिस्सों का मलबा नालियों में भर गया है, जिसके चलते जल निकासी ठप पड़ गई है। नाले बंद होने से सड़क पर गंदा पानी भर गया है, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो रहा है। मलबे के कारण पेयजल पाइपलाइन भी प्रभावित हुई, जिसके चलते कई घरों में पानी की सप्लाई बाधित हो गई। गुरुवार को परेशान लोग सीओ सिटी तृतीय पंकज श्रीवास्तव से मिले और स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने मौके पर ही स्थानीय पार्षद लईक को समस्या समाधान के निर्देश दिए। पार्षद ने क्षेत्र का निरीक्षण कर नगर निगम अधिकारियों को तुरंत व्यवस्था बहाल करने के लिए कहा।