1994 से फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला से जुड़े हैं धर्म किशोर, कलाकारों की वेशभूषा से लेकर मुकुट पहनाने तक संभालते हैं जिम्मेदारी
फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला मंचन की भव्यता और सफलता के पीछे जितना योगदान मंच पर अभिनय करने वाले कलाकारों का है, उतनी ही अहम भूमिका उन कार्यकर्ताओं की भी है, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे आयोजन को व्यवस्थित बनाने में जुटे रहते हैं। ऐसे ही समर्पित कार्यकर्ताओं में धर्म किशोर कुशवाहा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। वह वर्ष 1994 से फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला से जुड़े हुए हैं और तीन दशक से अधिक समय से पूरी निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
धर्म किशोर कुशवाहा की जिम्मेदारी रामलीला के स्टोर रूम और बैकस्टेज की व्यवस्थाएं संभालने की है। उनका काम केवल सामान की देखरेख तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मंचन के दौरान कलाकारों की जरूरतों का ध्यान रखना भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। मंचन के समय कलाकारों को निर्धारित समय पर वेशभूषा उपलब्ध कराना और उनके स्वरूप को तैयार कराने में सहयोग करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
विशेष रूप से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों को मुकुट पहनाने की जिम्मेदारी भी वह पूरी श्रद्धा और सावधानी के साथ निभाते हैं। मंच पर जब कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर रहे होते हैं, तब पर्दे के पीछे धर्म किशोर कुशवाहा यह सुनिश्चित करने में जुटे रहते हैं कि मंचन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न होने पाए। उनकी सतर्कता और अनुभव से कलाकारों को भी अपनी भूमिका निभाने में सहूलियत मिलती है।
बालकृष्ण जी के माध्यम से रामलीला से जुड़े
धर्म किशोर कुशवाहा बताते हैं कि फैक्ट्री में उनके साथ कार्यरत रहे श्री बालकृष्ण जी उन्हें पहली बार फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला मंच से जोड़कर लाए थे। इसके बाद वर्ष 1994 में शुरू हुआ उनका यह सफर आज भी निरंतर जारी है। शुरुआत में मिली जिम्मेदारियों को उन्होंने पूरी लगन से निभाया और धीरे-धीरे रामलीला की व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए।
समिति के प्रति उनके समर्पण, कार्यक्षमता और लंबे अनुभव को देखते हुए उन्हें संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। वह श्रीरामलीला समिति में कोषाध्यक्ष के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा लगभग 15 वर्षों तक कार्यकारिणी सदस्य के रूप में भी सक्रिय रहकर समिति के कार्यों में योगदान दिया।
सेवा और समर्पण से निभा रहे सांस्कृतिक विरासत की जिम्मेदारी
फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला से उनका तीन दशक से अधिक पुराना जुड़ाव केवल एक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी आस्था, लगन और सांस्कृतिक परंपरा के प्रति समर्पण को भी दर्शाता है। रामलीला जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में मंच पर दिखाई देने वाले कलाकारों के साथ-साथ पर्दे के पीछे काम करने वाले सहयोगियों का योगदान भी आयोजन की सफलता का आधार होता है।
धर्म किशोर कुशवाहा जैसे कार्यकर्ता बिना किसी प्रचार और दिखावे के अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए रामलीला की परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। उनकी वर्षों की निरंतर सेवाएं इस बात का प्रमाण हैं कि किसी भी आयोजन की भव्यता केवल मंच पर नजर आने वाले चेहरों से नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे मेहनत करने वाले समर्पित लोगों से भी कायम रहती है।