वादन के साथ भजन गायन में भी रखते हैं रुचि, वर्ष 2022 से फैक्ट्री स्टेट रामलीला में दे रहे सेवाएं
जागरण टुडे। फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला में जहां कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों को रामकथा के प्रसंगों से जोड़ते हैं, वहीं संगीत भी मंचन को प्रभावशाली बनाने में अहम भूमिका निभाता है। दृश्यों के अनुरूप वाद्य यंत्रों की धुनें और लय प्रस्तुति में भावनाओं को गहराई देती हैं। इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में गदियाना निवासी सनी राठौर भी योगदान दे रहे हैं। वह वर्ष 2022 से फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला मंच से जुड़कर नाल वादक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सनी राठौर अपनी नाल की थाप से रामलीला के मंचन में संगीत का रंग भरते हैं। उनकी भूमिका केवल वाद्य यंत्र बजाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भजन गायन में भी रुचि रखते हैं। धार्मिक आयोजनों से जुड़ाव और संगीत के प्रति लगाव के चलते वह रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली बनाने में सहयोग करते हैं।
प्रसंगों के अनुसार संगीत से बढ़ाते हैं मंचन का प्रभाव
रामलीला में संवाद और अभिनय के साथ संगीत का विशेष महत्व होता है। कथा के अलग-अलग प्रसंगों में संगीत की लय और ताल दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में मदद करती है। भक्ति से जुड़े दृश्यों में संगीत वातावरण को भक्तिमय बनाता है, वहीं अन्य प्रसंगों में इसकी लय मंचन के प्रभाव को बढ़ाती है।
सनी राठौर भी प्रसंगों और दृश्यों के अनुरूप नाल की थाप के माध्यम से मंचन को प्रभावी बनाने में योगदान देते हैं। कलाकारों के अभिनय के साथ संगीत का तालमेल रामलीला की प्रस्तुति को जीवंत बनाने में मदद करता है। यही कारण है कि मंच के पीछे रहकर संगीत साधना करने वाले कलाकार भी आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वादन के साथ भजन गायन में भी रुचि
सनी राठौर की खासियत यह है कि उनकी रुचि केवल वाद्य यंत्र बजाने तक सीमित नहीं है। वह भजन गायन में भी दिलचस्पी रखते हैं। संगीत और भक्ति से जुड़ाव उन्हें श्रीरामलीला की सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करता है।
फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला से पिछले कुछ वर्षों से जुड़े रहकर वह अपनी कला के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं। मंच पर कलाकारों का अभिनय और संगीतकारों की साधना मिलकर रामलीला को ऐसा स्वरूप देते हैं, जिससे दर्शक कथा के भावों से जुड़ पाते हैं।
सनी राठौर जैसे कलाकारों का योगदान यह भी दर्शाता है कि किसी सांस्कृतिक आयोजन की पहचान केवल मुख्य भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों से नहीं बनती, बल्कि संगीत और मंच के पीछे समर्पण से काम करने वाले लोगों की मेहनत भी उसे खास बनाती है। नाल की थाप और भजन गायन के प्रति अपनी रुचि के जरिए सनी राठौर फैक्ट्री स्टेट श्रीरामलीला की सांस्कृतिक विरासत को संजोने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।