उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में फैक्ट्री स्टेट में आयोजित श्रीरामलीला में मंगलवार को सती सुलोचना का मार्मिक प्रसंग मंचित किया गया। मेघनाथ वध और पति के प्रति सुलोचना के समर्पण का दृश्य देखकर दर्शक भावुक हो उठे। लीला देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक उमड़े और कलाकारों के अभिनय की सराहना की।
लक्ष्मण ने किया मेघनाथ का वध
कुंभकरण के वध से चिंतित रावण अपने पुत्र मेघनाथ को युद्ध के लिए भेजता है। युद्ध पर जाने से पहले मेघनाथ पत्नी सुलोचना से अंतिम विदाई लेकर निकुंभा देवी के मंदिर में यज्ञ करने पहुंचता है। विभीषण की सलाह पर प्रभु श्रीराम मेघनाथ को युद्ध के लिए ललकारते हैं। यज्ञ अधूरा छोड़कर युद्धभूमि में पहुंचे मेघनाथ का लक्ष्मण से भीषण युद्ध होता है। अंत में लक्ष्मण के बाणों से मेघनाथ का वध हो जाता है। मेघनाथ का कटा हाथ लंका पहुंचने पर सुलोचना सत्य की परीक्षा लेती हैं। हाथ से लिखे संदेश के जरिए उन्हें पता चलता है कि मेघनाथ का वध लक्ष्मण ने किया है। पति की मृत्यु का समाचार सुनकर सुलोचना, मंदोदरी और रावण शोक में डूब जाते हैं।
पति का शीश लेकर चिता पर बैठीं सुलोचना
सुलोचना पति का शीश लेने रामदल पहुंचती हैं। प्रभु श्रीराम के आदेश पर लक्ष्मण उन्हें सम्मानपूर्वक मेघनाथ का शीश सौंप देते हैं। सुलोचना शीश लेकर लंका लौटती हैं और पति का सिर गोद में रखकर चिता पर बैठ जाती हैं। इस मार्मिक दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
मंचन के दौरान सचिव एके व्यास, देवेश दीक्षित, संयुक्त सचिव अजय सक्सेना, निर्देशक अंकित सक्सेना, सहायक निदेशक सुहेल मोहम्मद, प्रभारी महेंद्र दीक्षित, सुरक्षा पर्यवेक्षक राममोहन अग्निहोत्री, व्यवस्थापक प्रदीप अग्निहोत्री, भोजन व्यवस्थापक रामकुमार दीक्षित, मीडिया प्रभारी रोहित सक्सेना और मंच संचालक सतीश सक्सेना सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
मंचन में रावण की भूमिका अंकित सक्सेना, मेघनाथ की कौशलेंद्र पांडे, विभीषण की देवेंद्र पाल, सुलोचना की अनामिका, मंदोदरी की चांदनी, राम की मोहित और लक्ष्मण की अमित ने निभाई। इसके अलावा अंगद के रूप में संदीप आर्य, हनुमान के रूप में अंकित अवस्थी, केसरी के रूप में सौरभ मोहन, सुग्रीव के रूप में सुभाष, नल के रूप में पीयूष, तार के रूप में सूर्यांश, नील के रूप में अर्जुन और सुषेण के रूप में विनोद पांडे सहित अन्य कलाकारों ने मंचन में भाग लिया।