सात साल की उम्र में शुरू किया था रंगमंच का सफर, मानवता वेलफेयर सोसायटी के जरिए जरूरतमंद बच्चों की मदद में जुटे अमित श्रीवास्तव
दिन में अदालत में कानून की बारीकियों के बीच लोगों को न्याय दिलाने की कोशिश और रात में रामलीला के मंच पर मर्यादा, त्याग और समर्पण के प्रतीक लक्ष्मण का किरदार। पेशे, कला और समाजसेवा के बीच संतुलन बनाकर चल रहे चिनौर निवासी अमित श्रीवास्तव की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। अधिवक्ता होने के साथ वह रंगकर्मी, लेखक और समाजसेवी के रूप में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। उनके लिए ये अलग-अलग भूमिकाएं महज शौक नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने के माध्यम हैं।
अनिल श्रीवास्तव और गीता श्रीवास्तव के पुत्र अमित ने मास कम्युनिकेशन, एलएलबी और एमए की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह अधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। कानूनी पेशे की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने रंगमंच और सामाजिक गतिविधियों से अपना जुड़ाव बनाए रखा है। इन दिनों ओसीएफ फैक्ट्री स्टेट की रामलीला में वह लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं।
सात साल की उम्र में शुरू किया रंगमंच का सफर
अमित का रंगमंच से जुड़ाव बचपन से ही रहा है। करीब सात वर्ष की उम्र में उन्होंने ओसीएफ रामलीला के मंच पर बाल कलाकार के रूप में अभिनय की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में रामलीला के विभिन्न पात्रों को निभाते हुए उन्होंने अभिनय की बारीकियां सीखीं। करीब एक दशक तक रामलीला में अलग-अलग भूमिकाएं निभाने के बाद वर्ष 2013 से वह निरंतर रंगमंच की गतिविधियों में सक्रिय हैं।
इस दौरान अमित ने वरिष्ठ रंगकर्मी जरीफ मलिक आनंद सहित कई निर्देशकों के निर्देशन में विभिन्न नाटकों में अभिनय किया। उन्होंने केवल अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि मंच और मंच के पीछे की व्यवस्थाओं में सहयोगी तथा सह-निर्देशक के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।
देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित नाट्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता सहित कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं। उनके लिए रंगमंच मनोरंजन का साधन भर नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास विकसित करने, मानवीय संवेदनाओं को समझने और समाज से संवाद स्थापित करने का माध्यम भी है।
रामलीला में लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे अमित
इस वर्ष ओसीएफ फैक्ट्री स्टेट की रामलीला में अमित को प्रभु श्रीराम के अनुज लक्ष्मण की भूमिका निभाने का अवसर मिला है। रामायण में लक्ष्मण का चरित्र भाई के प्रति समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, साहस और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे चरित्र को मंच पर जीवंत करना अमित के लिए खास अनुभव है।
दिन में वकालत और सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारियां निभाने के बाद रात में रामलीला के मंच पर उतरना उनके लिए कला और पेशे के बीच संतुलन बनाने जैसा है। कानून के क्षेत्र में लोगों के अधिकारों और न्याय से जुड़े विषयों पर काम करने वाले अमित, रंगमंच के जरिए भारतीय संस्कृति और पौराणिक पात्रों के आदर्शों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास भी कर रहे हैं।
उनके लिए लक्ष्मण का किरदार केवल संवाद बोलने या अभिनय करने तक सीमित नहीं है। वह इस चरित्र में निहित कर्तव्य, अनुशासन, त्याग और रिश्तों के प्रति समर्पण जैसे मूल्यों को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
2021 में स्थापित की मानवता वेलफेयर सोसायटी
अमित श्रीवास्तव ने वर्ष 2021 में मानवता वेलफेयर सोसायटी की स्थापना की। इसके माध्यम से वह वंचित और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और जनसेवा से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं।
सोसायटी के जरिए बच्चों को शिक्षा से जोड़ने, झुग्गी-बस्तियों में पाठशाला संचालित करने, पौधारोपण, जनजागरूकता अभियान चलाने और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्गों तक मदद पहुंचाने के साथ शिक्षा और जागरूकता के प्रति लोगों को प्रेरित करना है।
समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें राज्य के सर्वोच्च युवा पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है। इसके अलावा देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक और युवा गतिविधियों में सहभागिता के लिए भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है।
युवा कार्यक्रमों और सड़क सुरक्षा में भी भागीदारी
अमित मेरा युवा भारत (एमवाई भारत) और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़ी युवा गतिविधियों में भी सक्रिय रहे हैं। वह विभिन्न राष्ट्रीय और युवा कार्यक्रमों में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इन गतिविधियों के जरिए युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता विकसित करने में उनकी रुचि रही है।
इसके साथ ही उन्होंने सड़क सुरक्षा मित्र का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले अभियानों में सहभागिता की है। विभिन्न सरकारी और सामाजिक समितियों में भी वह अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
पेशे के साथ समाज और संस्कृति से जुड़ाव
अमित श्रीवास्तव का सफर बताता है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पेशे से तय नहीं होती। अधिवक्ता के रूप में कानून, रंगकर्मी के रूप में कला, लेखक के रूप में रचनात्मकता और समाजसेवी के रूप में जनकल्याण को साथ लेकर चलना उनके व्यक्तित्व की विशेषता है।
अदालत की गंभीरता से लेकर रामलीला के मंच की रोशनी तक और जरूरतमंद बच्चों के बीच समाजसेवा के कार्यों तक, अमित अपनी अलग-अलग भूमिकाओं के माध्यम से समाज से जुड़े रहने का प्रयास कर रहे हैं। उनका यह सफर संदेश देता है कि इच्छाशक्ति और समर्पण के साथ पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी कला, संस्कृति और समाजसेवा के लिए समय निकाला जा सकता है।